सावधान बाजार जा रहे हैं तो संभल कर जाएं, कब आपके मुंह में पाइप ठूस दे पुलिस वाले!

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पंकज ठाकुर

(हम बोलेगा तो कहेगा कि बोलता है)

कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर (शंखनाद मीडिया हाउस, जनता एक्सप्रेस)

शराबबंदी को लेकर बिहार विधानसभा से लेकर नेताजी तक में आरोप-प्रत्यारोप का खेल जारी है! इस बीच आम जनमानस के बीच अब पुलिस वालों को लेकर तरह-तरह चर्चा का विषय इन दिनों लोगों के जुबान पर एक पहेली बनी हुई है! दरअसल जब पुलिस वाले सिविल ड्रेस में खड़े रहते हैं! और मुंह में लोगों के पाइप डालना शुरू, अरे भैया आप राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री तो नहीं है! या आपके चेहरे पर लिखा हुआ है आप पुलिसकर्मी है! ऐसे में लोगों के झुंड के बीच जाकर अगर आप किसी के मुंह में पाइप डालते हैं शराब के केस को लेकर, तो आम जनमानस का गुस्सा जायज है! आखिर वह सिविल किसी पर्सन को क्यों मुंह की जांच कराए या बॉडी की जांच कराए! बरहाल दारू जांच के नाम पर पुलिस वाले के कई कुकृत्य सामने आए जिनमें आम भले मानस को बाजार के बीच चलना भी दुश्वार होते जा रहा है! ना जाने कब कौन मुंह में पाइप डाल दे, ठीक है पुलिसिया कार्यवाही को मैं गलत नहीं कह रहा हूं! लेकिन इस बीच कई आम जनमानस की शिकायत भी आना लाजमी है जहां पुलिस की दबंग का साफ दिखती नजर आई! तो आम जनमानस सबसे निचले पायदान पर, दरअसल सही में पूछिए पुलिस वाले की भी मजबूरी, उन्हें भी भलीभांति मालूम है आदेश का पालन ना हो तो शायद अगले ही पल इस्तीफा देने को या डिमोशन का फाइल उनके टेबल पर पहुंच जाएं! आखिर ठीक है चीख चिल्लाकर कहना दारू से जिनकी मौत हुई है! वह तो मर गए और वह एक सरकारी आंकड़ा बन गया! मरने वाले जरूर सरकारी आंकड़ा रहा हो लेकिन उन पथराई आंख से पूछिए उन पत्नी से पूछिए जिन्होंने इकलौता कमाने वाला खो दिया और आंखों के सामने सरकार उसे टीस दे रही है! शायद नेता जी ने जो दावे और वादे किए थे वह नेता जी के गाड़ी के उठे धूल से शायद सभी धुंध में मिल गई तभी तो जनता की हथेली खाली की खाली रह गई!
“”””कहां तो तय था चिराग हर घर के लिए, यहां चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए!””””

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