धीरज शर्मा की रिपोर्ट :-
नरगाकोठी विद्यालय में मातृ सम्मेलन आयोजित!
गणपत राय सलारपुरिया सरस्वती विद्या मंदिर नरगाकोठी चंपानगर भागलपुर में दिनांक 11 सितंबर 2022 रविवार को मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय बालिका शिक्षा संयोजिका रेखा चूड़ा समा ,क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम, क्षेत्रीय सचिव नकुल कुमार शर्मा, प्रदेश मंत्री भरत पूर्वे, प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा ,चिकित्सक डॉ रोमा यादव, समाज सेविका प्रीति शेखर, क्षेत्रीय बालिका शिक्षा प्रमुख शर्मिला कुमारी, भारती शिक्षा समिति सदस्या उत्तरा सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
मातृ सम्मेलन के उद्देश्य कथन के रूप में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय बालिका शिक्षा संयोजिका रेखा चूड़ा समा ने कहा कि लालयेत पंचवर्षाणि दश वर्षाणि तु ताडयेत पाँच वर्षों तक लालन-पालन एवं स्नेह अत्यावश्यक है। 5 वर्षों तक खेलना कूदना दौड़ना पढ़ना स्वच्छंद रूप से होनी चाहिए। बालकों के लिए 10 वर्षों तक अनुशासन, देखरेख, सही मार्गदर्शन देना आवश्यक है। 16 वर्ष के बालकों के साथ मित्रवत व्यवहार करना बालकों के सर्वांगीण विकास हेतु अत्यावश्यक है। माँ ही बालक बालिका का प्रथम पाठशाला होता है। मां का स्वभाव आचरण व्यवहार चरित्र आदि का प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। जीजाबाई एवं मदालसा जैसी माता पूरे संसार के लिए आदर्श एवं अनुकरणीय है। सोलह संस्कार के अंतर्गत जो महत्वपूर्ण संस्कार मां चाची एवं दादी से दादा से ही बालकों बालिकाओं में आता है। स्वदेशी वस्तुओं के लिए प्रेरित करना पर्यावरण से संबंधित बातों को बताना भी हमारा दायित्व है। मातृशक्ति की जागरूकता से ही बालकों में संस्कृति एवं देश भक्ति का भाव विकसित होता है। मातृशक्ति के जागरण से ही हमारा देश विश्व गुरु बन सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्वच्छता स्वास्थ्य फास्ट फूड से बचाव के लिए भी जागरूकता आवश्यक है। बच्चों के व्यवहार ,बातचीत करना ,खाना खाने का सही तरीका, अतिथि सत्कार का भाव विकसित करना है। बालक मां का ही अनुसरण करता है। छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखना आवश्यक है उसके व्यवहार विचार आचरण उसके मित्रों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। बच्चों का तुलना मां पिता के द्वारा नहीं होनी चाहिए। सभी बच्चों की प्रतिभा रुचि क्षमता अलग अलग होता है बालक अपने क्षमता एवं रूचि के अनुसार जीवन में आगे बढ़ते हैं।
क्षेत्रीय सचिव नकुल कुमार शर्मा ने कहा कि बालकों का सर्वांगीण विकास ही विद्या भारती का मुख्य उद्देश्य है। अपने बच्चों का जन्म दिवस अवश्य मनाएं लेकिन भारतीय संस्कृति को ध्यान में रखते हुए। वृक्ष लगाए गरीब बच्चों को वस्त्र दान करें निर्धन बच्चों को निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था कर सकते हैं। इस प्रकार के जन्मदिवस से बालकों के मन में दया दान क्षमा आदि सद्गुणों का विकास होता है। विद्या भारती के विद्यालयों के द्वारा बालिका शिक्षा के विकास हेतु निरंतर गोष्टी सम्मेलन एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
आज के मुख्य अतिथि समाज सेविका डॉ प्रीति शेखर ने कहा कि समर्थ नारी से ही समर्थ भारत का निर्माण हो सकता है। कुपुत्रो जायतो क्वचिदपि कुमाता न भवति माता कभी भी कुमाता नहीं हो सकती है। ऐतिहासिक घटनाओं से भी हम सीख सकते हैं। मां कौशल्या ने समय आने पर अपने पुत्र को वनवास की ओर विदा की है। आदर्श राम और कृष्ण भी आदरणीय मां के कर्तव्य निष्ठा का प्रतिफल है। महिलाएं ठान ले तो कुछ भी कर सकती है। महिला से ही परिवार एवं समृद्धि संपन्न परिवार से ही हमारा श्रेष्ठ भारत का निर्माण हो सकता है। नैतिकता चरित्र एवं संस्कार तो बालक मां पिता एवं परिवार से ही सीखता है।
क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम ने मार्गदर्शन के क्रम में कहा कि मातृशक्ति के जागरण से ही भारत पुनः श्रेष्ठ एवं महान बन सकता है। इसलिए स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग अत्यावश्यक है। लोकल को वोकल करना आवश्यक है। मातृ भाषा को बढ़ावा एवं सम्मान देने हेतु हिंदी में व्यवहार एवं हस्ताक्षर करें ।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रोमा यादव ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन के क्रम में कहा कि समाज में दिशा निर्देश एवं संस्कार देना ही विद्या भारती के विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य है। संपूर्ण पोषण करना ही मां का कर्तव्य है। शारीरिक पोषण से ही मानसिक विकास होता है। संतुलित भोजन आवश्यक है बच्चों के स्वास्थ्य के लिए मां को भी स्वस्थ होना आवश्यक है। बच्चों के शरीर एवं मानसिक विकास हेतु मां को सजग होना आवश्यक है। बच्चों के साथ मां का संतुलित आहार अत्यावश्यक है। मां का दूध बच्चों के लिए अमृत तुल्य होता है और ऐसे बच्चों का मां से ज्यादा लगाव होता है। सभी बच्चे प्रतिभावान होते हैं बच्चों की तुलना अन्य बच्चों से न करें ।बच्चों के सोच इच्छा दिनचर्या के बारे में अवश्य जानें। मां का सम्मान करने का भाव जागृत करें। बच्चों के मित्र के सम्बन्ध में भी जानना मां का दायित्व है।
क्षेत्रीय सह बालिका शिक्षा प्रमुख गीता मिश्रा ने आभार ज्ञापन करते हुए कहा कि मातृ सम्मेलन के अवसर पर प्राप्त ज्ञान को व्यवहारिक जीवन में अवश्य पालन करें।
समापन सत्र में बालिका शिक्षा में आए प्रतिभागी दीदी जी द्वारा अनुभव कथन प्रस्तुत किया गया। मंच संचालन प्रांतीय बालिका शिक्षा प्रमुख लिली कुमारी द्वारा एवं अतिथि परिचय क्षेत्रीय बालिका शिक्षा प्रमुख शर्मिला कुमारी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा ,प्रदेश मंत्री भरत पूर्वे, झारखंड के प्रदेश सचिव अजय कुमार तिवारी ,उत्तर बिहार से प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ,विद्यालय के अध्यक्ष डाॅ चंद्र भूषण सिंह, उपाध्यक्ष डॉ मधुसूदन झा ,प्रधानाचार्य नीरज कुमार कौशिक ,आनंदराम के प्रधानाचार्य अनंत कुमार सिन्हा, नंदकुमार इंदु, जितेंद्र प्रसाद ,मीडिया प्रभारी दीपक कुमार झा ,शशि भूषण मिश्र, प्रतिभागी बालिका शिक्षा की दीदी जी विद्यालय के आचार्य आचार्या एवं भागलपुर शहर के अंतर्गत चलने वाले शिशु विद्या मंदिर के भैया बहनों की अभिभाविका उपस्थित थे।




