ईट भट्ठा चालक गये अनिश्चित्कालीन हड़ताल पर!

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रिपोर्ट -पुरूषोतम कुमार जमुई :-

सलग-निर्माण कार्य होगा प्रभावित:लाल ईंट भट्ठा संचालक आज से हड़ताल पर, अनिश्चितकाल के लिए उत्पादन रहेगा ठप

6% जीएसटी, कोयले की अनुपलब्धता, ईंट का नया दर निर्धारित नहीं से आक्रोश
आज से जिले में लाल ईंट का उत्पादन अनिश्चितकाल के लिए ठप रहेगा। ईट भट्ठा

संचालकों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। जिला समेत पूरे बिहार में अब लाल ईंट भट्ठा अनिश्चित काल के लिए बंद होने से इन ईट भट्ठा में लाल ईंट का उत्पादन फिलहाल नहीं होगा। जिसके कारण जिला समेत पूरे बिहार में लाल ईट के दाम बढ़ने की संभावना है। दरअसल लाल ईंट भट्ठा संचालक को पिछले एक अप्रैल से 6 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ रहा है। इससे अखिल भारतीय और बिहार ईट निर्माता संघ में काफी गुस्सा है। इसी को देखते हुए दोनों संघ के आह्वान पर पूरे बिहार में ईट भट्ठा संचालन बंद करने का निर्णय लिया गया है।
मालूम होगी जिला में कुल 184 ईट भट्ठा संचालित हो रहा है। जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 1000 मजदूर हर एक ईट भट्ठा से जुड़े हुए हैं। अगर ईट भट्ठा में ईट उत्पादन का कार्य बंद हुआ तो करीब जिले के पौने दो लाख मजदूरों की मजदूरी छिन जाएगी। इतना ही नहीं जिले में बालू की किल्लत ईद के बढ़ते दाम के कारण कंस्ट्रक्शन कार्य काफी महंगा हो जाएगा।

1000 में मिलने वाला कोयला अब 24 हजार में मिलता है
इस संबंध में बिहार ईट निर्माता संघ के अध्यक्ष मुरारी कुमार मन्नू ने प्रेस वार्ता आयोजित कर कहा कि कोरोना के समय से ही भट्टे वाले को बिना कोई सरकारी सहायता के भट्टे का संचालन करना पड़ा है। पिछले वर्ष की शुरुआत से असमय बारिश में कच्चे ईट बार-बार गल गए, इतना ही नहीं कोयले की अनुपलब्धता और पूंजी के अभाव में बार-बार भट्ठे की आग बुझ जा रही है। उन्होंने बताया कि जो कोयला एक हजार कीमत वाली थी वह अब वह 24 हज़ार में बिकने लगा है। साथ ही बताया कि बिहार में कोयला की गुणवत्ता की जांच की व्यवस्था नहीं होने से निम्न क्वालिटी के कोल निर्माताओं को मिल रहा है। जिससे 10 हज़ार ईट बनाने में 40 से 50 मैट्रिक टन कोयले की खपत हो रही है। इससे भी लागत काफी अधिक हो रहा है। उन्होंने बताया कि बिहार राज्य माइनिंग कॉरपोरेशन के द्वारा जो कोयला आवंटित किया जाता है वह पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने से ईट भट्टे का संचालन काफी मुश्किल हो रहा है।

Fvo– लाल बालू की अनुपलब्धता ईंट की दाम बढ़ी
बेगूसराय ईट निर्माता संघ के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि सरकारी कार्यों में लाल ईट का प्रतिबंध और इसके मुख्य ग्राहक निम्न और मध्यम वर्गीय लोग के होने और लाल बालू की अनुपलब्धता से लोग ऊंची कीमत देकर ईट खरीदना या घर बनाने में असहज महसूस कर रहे हैं।। उन्होंने कहा कि एक अप्रैल से जीएसटी एक परसेंट से बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दिया गया है। लेकिन लोग जीएसटी देकर ईट खरीदना नहीं चाहते हैं। जिससे आर्थिक संकट से जूझ रहे ईट निर्माताओं को अपनी पूंजी से टैक्स देना पड़ रहा है।
7 वर्षों में ईट के सरकारी दर में वृद्धि नहीं हुई है
संघ जंग में उपस्थित चिमनी मालिक ललन सिंह शंभू सिंह कौशल सिंह मंटू यादव कृष्णा सिंह फौजी सिंह अन्य दर्जन चिमनी मालिकों के द्वारा बताया कि ईट निर्माण में उत्पादन लागत 4 गुनी बढ़ गई है लेकिन 7 वर्षों में ईट के सरकारी दर में वृद्धि नहीं हुई है। इन कारणों से भट्ठा मालिक आर्थिक कर्ज के तले डूबे हैं। जिसके कारण ईट निर्माण उत्पादन लागत इतनी बढ़ गई है कि मुनाफा छोड़िए लागत मूल्य भी ऊपर नहीं हो पा रहा है । उसपर सरकार का एक तरफा जीएसटी के कारण अब ईट निर्माताओं को मजबूर होकर भट्ठे का संचालन बंद करना होगा। चिमनी मालिक शंभू सिंह ने बताया कि लाल ईट निर्माण का कार्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पूंजीगत व्यवस्था का वरदान है। जहां पर बेरोजगार मजदूरों को ग्रामीण क्षेत्रों के मनरेगा से 5 गुना अधिक मजदूरी दिया जाता है। ऐसे उद्योग को बंद होते देख भट्ठा मजदूर चिंतित हैं । संघ ने सरकार से व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए जीएसटी का पुराना दर निर्धारित करने, कोयले को सस्ते दर पर मुहैया कराने लाल ईंट का सरकारी मूल्य तय करने की मांग की।

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