बापू की कर्मभूमि चंपारण में बापू के सपनों पर पानी फेर रहा जिला प्रशासन!

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मोतिहारी से धर्मेंद्र कुमार की रिपोर्ट!

बदहाली का आलम ऐसा की आश्रम बना मूत्रालय,,,,,

वर्ष 1987 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री विंदेश्वरी दुबे ने गांधी आश्रम का कराया था निर्माण,,,,

गांधी जी ने देखा था स्वच्छ भारत का सपना… लेकिन आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर भी स्मारक का हाल है बेहाल,,,

स्मारक के पास ही शौचालय निर्माण होने से स्मारक आने वाले लोगों को होती है खासा परेशानी,,,

अधिकारीयो व पदाधिकारियों को इतनी फुर्सत नहीं की स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बापू के स्मारक की सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो सके,,,

दुर्गंध और कचरे के बीच बापू के सुनहरे यादों को समेटे यह आश्रम अपनी बदहाली पर बहा रहा है आंसू,,,,,,

पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है,शासन प्रशासन के लोग लाखों करोड़ों खर्च कर रहे हैं, लेकिन पुर्वी चम्पारण,मोतिहारी के सगौली की ऐतिहासिक धरती अमृत महोत्सव के लिए नहीं बल्कि अपने गंदगी और अव्यवस्था के लिए चर्चा में बना हुआ है।अधिकारियों और पदाधिकारियों को इतनी फुर्सत नहीं है कि वे सुगौली में स्थित गांधी स्मारक के आसपास सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त कर सकें।हर रोज उसके आसपास का पूरा क्षेत्र मूत्रालय में तब्दील होता रहता है।सुगौली बाजार का मुख्य पथ पूरे इलाके में बदबू के लिए चर्चा में रह हुआ है। विभिन्न प्रखंडों से आने वाले लोग नाक बंद करके इस चित्र को पार करते हैं,गाँधी को राष्ट्रपिता की उपाधि मिली है लेकिन इनके मूर्ति के आस पास मूत्रालय शर्म की बात है।इस जगह पर लोग आते है और मूत्र विसर्जन कर के चले जाते हैं।चारो तरफ सिर्फ बदबू,और कचरा का अंबार लगा पड़ा है।ना कोई अधिकारी इसकी सुद्धि लेने आ रहे हैं और ना ही कोई जनप्रतिनिधि।चम्पारण जो गांधी के नाम से जाना जाता है उसी चम्पारण का एक हिस्सा सुगौली जहाँ गाँधी जी के मूर्ति को स्थापित करने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री विंदेश्वरी दुबे 1987 में में आये थे और आज वही गाँधी आश्रम के पास का एरिया मूत्रालय में तब्दील हो चुका है।
सुनिए क्या कहते हैं स्वतंत्रता सेनानी संगठन के जिलाध्यक्ष श्रीकिशोर पाण्डे और प्रखण्ड अध्यक्ष श्यामकिशोर प्रसाद।

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