लोडवो खेलबो जीतबो, दीदी अचानक फ्रंट फुट से बैकफुट पर कैसे?

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कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर शंखनाद मीडिया हाउस :-

(हम बोलेगा तो कहेगा कि बोलता है)

दीदी के नाक के नीचे उनके सबसे प्रिय नेता को पुलिस पकड़ कर ले गई दीदी कुछ ना कर पाई। उद्धव ठाकरे के नाक के नीचे से सेनानायक गायब हो गए सेना सहित भनक तक नहीं। केजरीवाल भी अचानक शांत हो गए तो क्या विपक्ष अब बस दीवार पर टंग कर रह गई। सोनिया गांधी के खिलाफ पहले ईडी का समन जारी और बुलाया भी गया। कांग्रेसी दिल्ली के जंतर मंतर से लेकर सांसद भवन के बाहर आंदोलन तक ही सीमित रह गई। तो क्या बात अब जेल तक जा पहुंचेगी। लेकिन वक्त का पैमाना अगर आप पल्टाएंगे जेल जाना राजनीतिक कद बढ़ाने जैसा हो जाता है। बरहाल नजर डालते हैं विपक्ष की कतार पर जहां सभी राजनीतिक दलों के अपने-अपने पार्टी के पहचान पर नेता तो है। लेकिन किसी के पास ऐसा सेनानायक नहीं जिसे युद्ध मैदान में सेना सहित उतारा जा सके। दरअसल राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि ममता बनर्जी महाराष्ट्र में हुए खेला होवे को लेकर अपने खेला होने का डर सताने लगा है। और दीदी ने सत्ता पर बने रहने के लिए अचानक बैकफुट पर आकर ही बल्लेबाजी करना मुनासिब समझा। कहते हैं ना सेना खत्म कीजिए पार्टी खत्म और दीदी के बयान में भ्रष्टाचार का कोई बचाब नहीं। आज दीदी दिल्ली से चले पुरवइया हवा को पकड़ चुकी है। चलिए मैं आपको याद दिलाता हूं। यह वही दीदी है जो सीबीआई जैसे अधिकारी को बंगाल पुलिस ने थाने में बिठाकर रखवाया था। ईडी का नाम आते ही दीदी गुस्से से आगबबूला हो जाया करती थी। बाकी तो यह पब्लिक है सब जानती है।

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