तो क्या गांव से लेकर शहरों तक, छूटभैया नेता सत्तासीन सरकार को लगा रही है दांव पर!

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कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर!

(हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है)

कहते हैं ना राजनीति में कोई किसी का नहीं होता एक तराजू में तौल कर दोस्ती दुश्मनी तोल माप कर कर समीकरण बनता है। खैर यह रही राजनीति समीकरण की बात लेकिन आज के गांव के छूट भैया नेता चाहे वह जिस भी पार्टी से रहे अगर हमारे मुख्यमंत्री किसी इफ्तार पार्टी में पहुंच जाए तो अपने आप प्रखंड से लेकर शहर तक छूट भैया नेता अलग-अलग समीकरण जोड़कर सरकार तक बना देते हैं। हां यह दीगर बात है कि खेवनहार किसी भी हाल में नीतीश कुमार ही होंगे। अब जरा छूटभैया नेता के जबरदस्त हवाई फायरिंग देखिए। जिन्हें ठीक से पंचायत की राजनीति एबीसीडी समझ नहीं है। वह पटना तक सरकार बना देते हैं। दरअसल इन्हीं छूट भैया नेता के कारण सत्तासीन सरकार को कहीं ना कहीं पिछले पांव पर आकर खड़ा होना होता है। हालांकि जिसके कारण कई चुनावों में इसका परिणाम भी भुगतना पड़ा था सत्तासीन सरकार को उनके छूट भैया प्रतिनिधि ने ही विश्वासघात रूपी तीर चला कर खेवनहार को ही मुसीबत में डाल दिया। जिसकी भरपाई जनता अब तक भुगतान भुगत रही है। जनता विकास खोजती है हुजूर और विकास की जो रफ्तार दौड़ रही थी। लेकिन 2 वर्षों से विकास लगातार चार कंधों को चीख चीख कर पुकार रहा है। खैर अब ऐसे में सत्तासीन सरकार के पार्टी के आलाकमान को
आगे आकर खुद से छूटभैया को दरकिनार करने की जरूरत है जिससे सत्तासीन सरकार की साख बच सके। ऐसे में केंद्रीय सूत्र बताते हैं कि पंचायत वार पूरी टीम की डिटेल को अध्यक्ष द्वारा मनाया गया है। और उनके द्वारा विकास कार्यों में कितनी भागीदारी निभाई गई है। जिसके बाद फैसला लिया जाएगा। सूत्र यह भी बताते हैं पार्टी के इस कड़े फैसले से कई नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें तक खींच गई है।।

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