रांची (झारखंड):-स्कूली बच्चों के निवाले पर भी भ्रष्टाचारी कर रहे हैं सेंधमारी!

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शंखनाद ब्यूरो झारखंड

मिड डे मील के अनाज की हर बोरी में हो रही चोरी, डिलर और विभाग एक दूसरे पर लगा रहे आरोप!

रांची: भ्रष्टाचारी लोग इस बात की फिक्र नहीं करते की उनकी काली करतूतों से किनको कितना नुकसान होता. उनको पूरा फोकस इस पर रहता है कि उनको अनाप-शनाप कमाई कैसे हो. इसी सोच का नतीजा है कि स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील के अनाज में भी सेंधमारी हो रही है. स्कूलों को भेजे जाने वाले अनाज की बोरियों में से तीन से चार किलो अनाज कम आ निकलता है. इसका सीधा असर राज्य के करीब 34 लाख स्कूलों के 28 लाख बच्चों के निवाले पर पड़ रहा है.

स्कूल प्रबंधकों ने स्पष्ट कहा है कि हर अनाज की बोरी वजन से कम रहने के कारण बच्चों को पूरा अनाज देने में परेशानी हो रही है. जबकि यह कोई नया मामला नहीं, बल्कि हमेशा ही इस परेशानी से जूझना पड़ता है. स्कूल खुले रहने पर स्कूल में ही भोजन बनाकर सभी को किसी तरह से भोजन करा दिया जाता था, लेकिन स्कूल बंद होने के बाद वजन से बच्चों को अनाज देना एक बड़ी चुनौती बन गई है. खासकर के जब अनाज ही स्कूलों को कम मिले

यह सारा खेल पीडीएस डिलरों के यहां से किया जा रहा है. जो भी अनाज की बोरियां है उसमें अधिकतर डिलरों के यहां से ही लायी जा रही हैं. कुछ जगहों पर झारखंड खाद्य निगम के गोदामों से भी अनाज स्कूलों के लिए भेजा रहा है. इन दोनों जगहों से बोरियों का वजन 5.5 किलो से कम पाया जा रहा है, जबकि इस वजन को मानक वजन के रूप में रखा गया है.

स्कूल प्रबंधकों ने भी की है शिकायत
स्कूल प्रबंधकों ने कम अनाज मिलने की शिकायत अपने संबंधित अधिकारियों से की है. इसमें राजधानी के ही कई स्कूल शामिल हैं, कांके स्थित राढ़ा पंचायत, रातू प्रखंड सहित बेड़ो व अन्य क्षेत्रों के स्कूल शामिल हैं. दूसरी ओर राशन लाभुकों ने भी कम अनाज मिलने की शिकायत की है.

सभी जिलों से रिपोर्ट लेने की तैयारी
विभाग ने मिल शिकायत पर सभी जिलों से रिपोर्ट लेने की तैयारी शुरू कर दी है. साथ ही कम वजन भेजे जाने को लेकर गोदामों में भी निगरानी करने को कहा गया है. डीलरों को यह भी कहा गया है कि हमेशा दुकानों में अनाज आने के बाद कुछ बोरों का वजन जरूर करवाएं और कम अनाज आने पर तुरंत इसकी शिकायत करें. साथ ही यदि उनके पास आयी अनाज बोरियों का वजन कम होता है तो वे उस बोरे को खोले नहीं. हालांकि विभाग की ओर से कहा गया है कि गोदामों से कम अनाज भेजे जाने की कोई शिकायत अभी तक नहीं मिली है.

डिलर बोले, गोदाम से मिली हर बोरी में पांच kg अनाज कम
राशन डिलरों का कहना है कि अनाज की जो बोरी आती है वो तय वजन से काफी कम रहती है. हर बोरी में पांच किलो तक चावल और गेहूं कम भेजा जाता है. इसके बाद डीलर कम राशन देने को मजबूर होता है. राशन डीलर एसोसिएशन की ओर से मोहम्मद काजिम बताते हैं कि चावल की बोरी के लिए जो तय वजन रखा गया है वो 50 किलो 500 ग्राम है. लेकिन गोदाम से जो चावल की बोरी दुकानों तक भेजी जाती है वो 45 या 46 किलो ही रहती है. इसी तरह गेहूं का वजन 52 किलो 500 ग्राम होना चाहिए लेकिन इसमें भी पांच किलो तक की कमी रहती है.

एसोसिएशन ने कहा है कि इस तरह से कम अनाज देने पर हमेशा शिकायतें की गयी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी. इसके बाद जब लाभुकों को कम राशन दिया जाता है तो प्रशासन की ओर से छापेमारी कर डिलरों को परेशान किया जाता है.

सूबे के करीब 2000 डीलरों पर हो चुकी है कार्रवाई:
राज्य में करीब 26 हजार राशन डीलर हैं, जिसमें से करीब 2000 डीलरों पर कार्रवाई की जा चुकी है. कई पर एफआईआर भी दर्ज की गई है. इसके अलावा उड़नदस्ता टीम ने शिकायतें मिलने के बाद करीब 15 हजार डीलरों के दुकानेां की जांच की है. इसमें सबसे अधिक शिकायतें राशन नहीं देने, कम देने या पैसे अधिक लेने की शिकायतें मिली थी. जांच में कुछ आरोप गलत पाये गये जबकि कुछ की जांच चल रही है.

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