रिपोर्ट – मनोज कुमार!
बेतिया से खबर है जहां नेपाल में लगातार हो रही बारिश और वाल्मीकिनगर गंडक बराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद पश्चिम चंपारण जिले में एक बार फिर बाढ़ का खतरा गहरा गया है। गंडक नदी के तटीय इलाकों में बसे दर्जनों गांव जलमग्न हो गए हैं। नौतन प्रखंड में बाढ़ की सबसे भयावह तस्वीर सामने आ रही है, जहां मंगलपुर कला और भगवानपुर पंचायत के विशंभरपुर के कई गांवों में पानी घुसने से बड़ी आबादी प्रभावित हुई है। ग्रामीणों को घर-बार छोड़कर तटबंध पर शरण लेने को मजबूर होना पड़ा है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब पांच दिनों से गांवों में पानी बढ़ने लगा था। लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी मगर अभी तक नाही कोई जिला प्रशासन उनकी शुद्ध लेने पहुंचा है नाहीं कोई जनप्रतिनिधि ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। धीरे-धीरे पानी बढ़ता गया और देखते ही देखते घर, सड़क और खेत जलमग्न हो गए।
स्थिति रविवार की रात और गंभीर हो गई, जब वाल्मीकिनगर गंडक बराज से करीब 5.15 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना सामने आई। भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और तटीय क्षेत्रों के कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया। नौतन के विशंभरपुर समेत आसपास के गांव टापू बन गया है
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण खाने-पीने की सामग्री, पशुओं के चारे और आवागमन की समस्या उत्पन्न हो गई है। कई जगहों पर सड़कें पानी में डूब गई हैं, जिससे गांवों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है। लोगों ने प्रशासन से नाव, भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।
बताया जाता है कि नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार बारिश होने पर नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ता है। यही नदी बिहार में प्रवेश करने के बाद गंडक के नाम से जानी जाती है। पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से बिहार में प्रवेश करने वाली गंडक का बढ़ा जलस्तर जिले के तटीय क्षेत्रों के साथ आगे के इलाकों को भी प्रभावित करता है। ऐसे में नेपाल में बारिश का सिलसिला जारी रहने पर आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है।




