कलेक्ट्रेट गेट पर ताला, सड़कों पर गूंजा ‘वोट चोर गद्दी छोड़ो’ का नारा! भागलपुर में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन!

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रिपोर्ट – निभाष मोदी!


भागलपुर | 28 सितंबर 2026
‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर भागलपुर में सोमवार को कांग्रेस का आक्रोश सड़क पर उतर आया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी (AICC) और बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमिटी की ओर से जिला समाहरणालय कार्यालय के समक्ष विशाल विरोध-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्रदर्शनकारी जैसे ही समाहरणालय के मुख्य द्वार के पास पहुंचे, सुरक्षा के मद्देनजर मुख्य गेट को बंद कर दिया गया और गेट पर ताला लगा दिया गया। इसके बाद समाहरणालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। देखते ही देखते पूरा इलाका राजनीतिक नारों से गूंज उठा।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “वोट चोर गद्दी छोड़ो” और “वोट चोर कहां मिलेगा, बीजेपी के दफ्तर में” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए। कांग्रेस देशभर में इन मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रही है और आज जिला कलेक्ट्रेटों के समक्ष मार्च का आह्वान किया गया था।
प्रदर्शन का नेतृत्व भागलपुर कांग्रेस जिला प्रभारी राहुल सिंह चौहान सहित पार्टी के स्थानीय नेताओं ने किया। इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और पार्टी के झंडे लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि मतदाता के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब तक कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती और उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा। कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भी देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं।हालांकि भागलपुर में प्रदर्शन के दौरान किसी बड़े उपद्रव की सूचना नहीं मिली। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। समाहरणालय की ओर जाने वाले रास्तों और प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे, प्रदर्शनकारियों के आक्रोश और लगातार गूंजते नारों के बीच समाहरणालय का मुख्य द्वार बंद रहा। कुछ देर तक चले इस विरोध-प्रदर्शन ने भागलपुर की राजनीति में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को फिर से केंद्र में ला दिया।

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