डॉ अनमोल कुमार
अनन्त चतुर्दशी भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस दिन दो बड़े कारणों से इसका बहुत महत्व है।
भगवान विष्णु की पूजा – अनन्त रूप:
अनन्त का अर्थ है जिसका कोई अंत न हो। भगवान विष्णु के अनन्त रूप की पूजा इस दिन होती है।
कथा: महाभारत में जब पांडव जुए में सब कुछ हार गए थे, तो श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को अनन्त व्रत करने को कहा था। इस व्रत से उन्हें खोया हुआ राज-पाट वापस मिला।
पूजा विधि:इस दिन 14 गांठों वाला अनन्त धागा (रेशम या सूत का) बनाया जाता है। उसे हल्दी-कुमकुम से रंग कर भगवान विष्णु को अर्पित करके दाएं हाथ में बांधा जाता है। मान्यता है कि ये 14 गांठें 14 लोकों की प्रतीक हैं।
गणेश विसर्जन:
इसी दिन 10 दिन के गणेशोत्सव का समापन होता है। लोग “गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारे के साथ बाप्पा को विदा करते हैं।
व्रत का फल क्या है? इस व्रत को करने से जीवन के सभी संकट टल जाते हैं।- धन-धान्य और सुख-समृद्धि आती है। अनन्त धागा बांधने से अनन्त काल तक पुण्य मिलता है।
इस दिन क्या न करें?
इस दिन नमक वाला भोजन नहीं करना चाहिए और व्रत कथा सुनना बहुत जरूरी माना जाता है।



