रिपोर्ट – निभाष मोदी!
भागलपुर। गंगा के भीषण कटाव और बाढ़ की मार झेल रहे भागलपुर के राघोपुर में बुधवार को उस वक्त माहौल गरमा गया, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रस्तावित आगमन को लेकर इंतजार कर रहे बाढ़पीड़ितों को उनके वहां नहीं पहुंचने की जानकारी मिली। स्थानीय लोगों में नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री के पोस्टर और बैनर फाड़ दिए और उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
राघोपुर इन दिनों पूरे भागलपुर जिले में बाढ़ और गंगा कटाव का सबसे चर्चित और संवेदनशील इलाका बना हुआ है। यहां गंगा का कटाव लगातार लोगों के घर और धार्मिक स्थलों को अपनी चपेट में ले रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, दर्जनों घर गंगा में समा चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि कई परिवार अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। राघोपुर में मंदिर भी कटाव की चपेट में आए हैं। दुर्गा मंदिर और हनुमान मंदिर समेत कई धार्मिक स्थलों के गंगा में समा जाने से लोगों में भारी पीड़ा और आक्रोश है।इसी बीच मुख्यमंत्री के राघोपुर पहुंचकर बाढ़पीड़ितों से मुलाकात करने की उम्मीद लोगों ने लगा रखी थी। लोगों का कहना है कि जब उनके घर उजड़ रहे हैं और धार्मिक स्थल तक गंगा में समा रहे हैं, ऐसे समय में वे मुख्यमंत्री से सीधे अपनी परेशानी बताना चाहते थे। लेकिन मुख्यमंत्री के यहां नहीं पहुंचने से ग्रामीणों का गुस्सा सामने आ गया।बताया गया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर थे। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार केंद्रीय मंत्री को भागलपुर के पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थित राहत शिविर में पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मिलने और राहत कार्यों का जायजा लेना था।इधर, राघोपुर में मुख्यमंत्री के इंतजार में बैठे लोगों के बीच जब उनके नहीं पहुंचने की बात सामने आई तो नाराजगी बढ़ती चली गई। कुछ लोगों ने पोस्टर-बैनर फाड़ दिए और मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान स्थानीय लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि राघोपुर की स्थिति बेहद गंभीर है और यहां सिर्फ दौरे की घोषणा नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है।
गौरतलब है कि इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भागलपुर के राघोपुर क्षेत्र का दौरा कर गंगा कटाव की स्थिति का जायजा ले चुके हैं। उस दौरान कटाव प्रभावित लोगों को राहत और स्थायी समाधान की उम्मीद जगी थी।
अब सवाल यह है कि राघोपुर में लगातार हो रहे कटाव से उजड़ रहे परिवारों की मांग कब पूरी होगी? दर्जनों घर और मंदिर गंगा में समा चुके हैं, जबकि बाढ़पीड़ितों का कहना है कि उन्हें तत्काल राहत के साथ-साथ पुनर्वास और कटाव से स्थायी सुरक्षा चाहिए। मुख्यमंत्री के नहीं पहुंचने के बाद सामने आया यह आक्रोश प्रशासन और सरकार के लिए राघोपुर के हालात की गंभीरता का एक और संकेत माना जा रहा है।




