घने जंगलों और दर्जनों पहाड़ियों से घिरा एक रहस्यमय स्थल है पांडेश्वर नाथ मंदिर!

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शोभाराम पंडा की रिपोर्ट

पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान की थी इस दुर्लभ शिवलिंग की स्थापना

राज्य सरकार के उपेक्षा का शिकार इस दुर्लभ स्थल पर हो चुका है कई फिल्मों का फिल्मांकन

बासुकीनाथ (दुमका)

शोभाराम पंडा की रिपोर्ट

झारखंड की उप राजधानी दुमका जिला के जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत बरमासा पंचायत के शिवनगर गांव के समीप चारों और पहाड़ियों से घिरे मनोरम एवं रमणीक स्थल पर कई रहस्यों को समेटे प्राचीन पांडेश्वर नाथ का मन्दिर स्थित है|किंवदंतियों के अनुसार इस प्राचीन शिवलिंग की स्थापना महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान की थी। चारो और घने जंगलों और दर्जनों पहाड़ियों से घिरा यह एक रहस्यमय स्थल है। आज से लगभग पचास वर्ष पहले यह स्थल बाहरी श्रद्धालुओं के लिये एक दुर्गम स्थान था । जिससे यहाँ बाहरी श्रद्धालुओं का आवागमन नहीं के बराबर था । बाबा पांडेवेश्वर नाथ के मंदिर का निर्माण किसने कराया एवं कब कराया इसका कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है|मन्दिर के चारों तरफ प्राचीन मंदिरों के अवशेष भरे पड़े हैं। जो जीर्ण अवस्था मे है। बाबा पांडेवेश्वर नाथ मन्दिर की दूरी बाबा बासुकीनाथ से लगभग पन्द्रह किमी है। यहाँ जाने के लिए बासुकीनाथ देवघर राष्ट्रीय राजमार्ग NH 114/A पर स्थित सहारा नामक स्टॉपेज पर उतरना पड़ता है । सहारा से उत्तर पश्चिम की और एक सड़क सरैयाहाट तक जाती है। जिसमें लगभग दो किमी की दूरी तय करने के बाद बरारी गांव से पांडेवेश्वर नाथ मंदिर तक एक लिंक सड़क गई है जो बेहतर अवस्था मे है,से वहाँ पहुँचा जा सकता है|अपने निजी वाहनों से जाने में अच्छा रहता है।
पांडेवेश्वर नाथ मन्दिर के समीप ही पांडेवेश्वर नाथ पहाड़ है । जिसमें घने जंगलों के बीच पांडव गुफा,द्रोपदी झरना,भीम ताल,प्राचीन कूप एवं पहाड़ के ऊपर अन्य कई झरने एवं कलाकृतियों को ढूंढ़ने से देखा जा सकता है। दुर्लभ जड़ी बुटियों कीमती पेड़ पौधों को समेटे यह पहाड़ लगभग सात किमी के दायरे में फैला हुआ है । यहाँ आने वाले पर्यटकों को खाने पीने का सामान अपने साथ ही लाना चाहिए । पांडेवेश्वर मन्दिर के सामने ही एक तालाब है। यज्ञ शाला,नवनिर्मित विवाह भवन एवं ठहरने के लिये एक विश्रामालय भी है। मन्दिर परिसर में माता पार्वती एवं भैरव नाथ का मन्दिर है|परिसर में दर्जनों प्रस्तर भग्नावशेष बिखरे पड़े है जो मन्दिर के प्राचीनता एवं भव्यता को प्रमाणित करते हैं । इस स्थान पर कई फिल्मों का फिल्मांकन भी हुआ है|स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सरकार की उपेक्षा के कारण इस स्थान का समुचित विकास नहीं हो पाया है|

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