भागलपुर पर बाढ़ की बड़ी मार, स्कुल कॉलेज हॉस्टल तक जलमग्न!

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रिपोर्ट – निभाष मोदी!

बाढ़ का खौफ अब विश्वविद्यालय तक पहुंचा! तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी का गर्ल्स हॉस्टल खाली, छात्राओं के सामने पढ़ाई और रहने का संकट

भागलपुर में लगातार बढ़ते बाढ़ के प्रकोप ने अब तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास को भी अपनी चपेट में ले लिया है। बाढ़ का पानी बढ़ने के कारण आज 4 सितंबर की सुबह विश्वविद्यालय परिसर स्थित गर्ल्स हॉस्टल को खाली कराने का आदेश दिया गया है। हॉस्टल खाली होने के बाद छात्राओं के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर अब वे रहेंगी कहां और उनकी पढ़ाई कैसे जारी रहेगी?
बाढ़ का पानी जिस तेजी से आसपास के इलाकों में फैल रहा है, उससे विश्वविद्यालय और उससे जुड़े संस्थानों पर भी संकट गहराता दिखाई दे रहा है। अब तक बाढ़ से प्रभावित गांवों और निचले इलाकों की तस्वीरें सामने आ रही थीं, लेकिन अब विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास तक पानी पहुंचने के बाद छात्राओं में भी दहशत का माहौल है।

हॉस्टल खाली करने का आदेश, लेकिन आगे की व्यवस्था का क्या?

पीड़ित छात्राओं का कहना है कि उन्हें हॉस्टल खाली करने का आदेश तो दे दिया गया, लेकिन इसके बाद उनकी पढ़ाई और रहने की व्यवस्था को लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। छात्राओं के मुताबिक, अचानक हॉस्टल खाली करने की स्थिति पैदा होने से वे बेहद परेशान हैं।छात्राओं ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि “हम लोगों का किस तरह क्लास होगा, किस तरह रहने की व्यवस्था होगी, विश्वविद्यालय प्रबंधन इस पर कुछ भी संज्ञान नहीं लिया है। हम लोग परेशान हैं। बस हम लोगों को हॉस्टल खाली करने का आदेश दे दिया गया है। हम लोग किसी तरह हॉस्टल से निकल रहे हैं। अब सब कुछ भगवान भरोसे है।”छात्राओं का कहना है कि वे दूर-दराज के इलाकों से पढ़ाई करने के लिए विश्वविद्यालय आती हैं। ऐसे में अचानक हॉस्टल खाली कराने के बाद उनके सामने सुरक्षित ठिकाने का संकट खड़ा हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि छात्राओं को हॉस्टल से बाहर जाना पड़ता है तो उनकी नियमित कक्षाएं किस तरह संचालित होंगी और वे विश्वविद्यालय तक कैसे पहुंचेंगी?
बढ़ते बाढ़ के प्रकोप से विश्वविद्यालय भी खतरे में
गंगा और आसपास की नदियों में बढ़ते जलस्तर के बीच भागलपुर में बाढ़ का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। निचले इलाकों में पानी घुसने के बाद अब शिक्षण संस्थान भी इसकी जद में आते नजर आ रहे हैं। महिला छात्रावास खाली कराए जाने की घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर पानी का स्तर और बढ़ा तो विश्वविद्यालय के अन्य हिस्सों और विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था होगी?
छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल हॉस्टल खाली कराने का आदेश देना पर्याप्त नहीं है। रहने की वैकल्पिक व्यवस्था, सुरक्षित आवागमन और पढ़ाई जारी रखने को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट कदम उठाना चाहिए,फिलहाल छात्राएं किसी तरह हॉस्टल से बाहर निकल रही हैं और उनके सामने भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हैं। बाढ़ का पानी अब सिर्फ घरों और गांवों के लिए खतरा नहीं रह गया है, बल्कि विश्वविद्यालय और गर्ल्स हॉस्टल तक पहुंच चुका है। ऐसे में देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन छात्राओं की इस गंभीर समस्या पर कब तक ठोस कदम उठाता है।

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