रिपोर्ट – अमित कुमार!
बिहार बीजेपी के समीक्षा बैठक कार्यक्रम कार्यालय परिसर के बाहर आज मंत्री मिथिलेश तिवारी बयान पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे
बिहार बीजेपी के समीक्षा बैठक कार्यक्रम के बाद कार्यालय परिसर के बाहर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पत्रकारों से बातचीत की। उनके चेहरे पर काम को लेकर संतोष साफ दिख रहा था।
बातचीत की शुरुआत उन्होंने शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों से की। मंत्री ने कहा कि एक समय था जब शिक्षा विभाग को लेकर शिकायतें और फरियादें रोजाना बड़ी संख्या में आती थीं। फाइलें तबादले वेतन और नियुक्ति की दिक्कतें लेकर लोग दूर दूर से आते थे। लेकिन अब स्थिति बदली है। आज विभाग से जुड़े मामले बहुत कम आ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण उन्होंने बताया कि वे खुद लोगों से नियमित रूप से मिलते हैं और हर समस्या को समय पर सुनते हैं। जब बातचीत का रास्ता खुला रहता है तो छोटी छोटी दिक्कतें वहीं हल हो जाती हैं। इसी वजह से धीरे धीरे सभी मुद्दे सुलझते जा रहे हैं और अब नए मामलों के आने की गति भी कम हो गई है।
मंत्री जी ने बताया कि वे जनता और शिक्षकों के लिए रोजाना तीन बार मिलने का समय तय करते हैं। सुबह दस बजे वे अपने सरकारी आवास पर बैठते हैं वहां शिक्षक अभिभावक और आम लोग अपनी बात रखते हैं। इसके बाद शाम चार बजे वे अपने मंत्रालय और कार्यालय में उपस्थित रहते हैं। वहां विभागीय काम के साथ साथ जो लोग सीधे मिलना चाहते हैं उनसे भी चर्चा होती है। और दिनभर के काम निपटाकर रात में लौटने के बाद दस बजे से लेकर दो बजे तक फिर वे अपने सरकारी आवास पर आकर मिलने वाले हर व्यक्ति से बात करते हैं। उनका साफ कहना था कि जब तक अंतिम व्यक्ति की बात नहीं सुन ली जाती तब तक वे अपनी कुर्सी से नहीं उठते।
शिक्षकों के तबादले और उनकी व्यक्तिगत समस्याओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके पास जो भी शिकायतें आईं उन्हें गंभीरता से लिया गया। तबादले से जुड़े मुद्दे हों या वेतन पदस्थापन या पारिवारिक कारण से जुड़ी दिक्कतें अधिकांश मामलों का समाधान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि शिक्षक व्यवस्था की रीढ़ हैं। अगर शिक्षक निश्चिंत होकर पढ़ाएगा तभी बच्चों का भविष्य बेहतर बनेगा। इसलिए उनकी समस्याओं को प्राथमिकता पर निपटाना जरूरी है।
पत्रकारों ने जब TRE 4.0 यानी शिक्षक बहाली कला और डांस शिक्षकों की बहाली भाषा के विषय और OBC तथा ST की सीटों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन और मीडिया में चल रही बहसों का जिक्र किया तो मंत्री का जवाब सीधा था। उन्होंने कहा कि हर भर्ती और हर प्रक्रिया के लिए नियम पहले से बने हुए हैं और सब कुछ उसी दायरे में हो रहा है। हर चीज का मीडिया ट्रायल करना जरूरी नहीं है। जो लोग सीधे आकर अपनी समस्या बताते हैं उनकी बात सुनी जाती है और समाधान निकाला जाता है। लेकिन जो केवल मीडिया के सामने बोलते हैं और विभाग से आकर बात नहीं करते हैं तो उनकी मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अंत में उन्होंने अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया। कहा कि सभी अभ्यर्थी अब पूरी तरह आश्वस्त हैं और अपनी पढ़ाई में जुट गए हैं। जिन अभ्यर्थियों के सामने पहले कोई अड़चन थी उनके लिए भी रास्ता निकाल दिया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे स्टेशन पर किसी की ट्रेन छूट जाए तो रेलवे उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करता है उसी तरह जिन अभ्यर्थियों के लिए दिक्कत थी उनके लिए भी विकल्प तैयार किए गए हैं ताकि किसी का नुकसान न हो।




