रिपोर्ट – सुमित कुमार!
विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के चौथे दिन कच्ची कांवरिया पथ पर श्रद्धा, भक्ति और कला का अनूठा संगम देखने को मिला। तारापुर प्रखंड के मिल्की गांव के समीप कोलकाता से आए शिवभक्तों द्वारा ले जाया जा रहा 100 किलो वजनी और करीब नौ फीट ऊंचा अर्धनारीश्वर स्वरूप का डोली कांवर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। शिव के त्रिशूल पर लगी रंग-बिरंगी एलईडी लाइटें और भव्य सजावट राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच रही थीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रुककर इस अनोखे कांवर के साथ फोटो और वीडियो बनाते नजर आए।
कोलकाता के दक्षिण गड़ी (24 नंबर रेलवे गेट) स्थित श्री श्री नंदेश्वर महादेव मंदिर से आए विशाल सिंह, आकाश सिंह और कार्तिक मंडल ने बताया कि उनके 26 सदस्यीय दल ने इस विशेष कांवर को तैयार कराया है। इसे बनाने में करीब 45 दिन (डेढ़ महीना) लगे और लगभग डेढ़ लाख रुपये की लागत आई। उन्होंने बताया कि पिछले 35 वर्षों से उनका दल सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहा है। पहले उनके वरिष्ठ सदस्य इस परंपरा का निर्वहन करते थे, अब नई पीढ़ी इसे आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष शिव-पार्वती, नंदी महाराज और गणेश जी की भव्य डोली लेकर बाबाधाम गए थे, जबकि इस वर्ष नंदी पर विराजमान अर्धनारीश्वर महादेव की झांकी तैयार की गई है। इससे पहले उनका दल उत्तराखंड के तारेश्वरनाथ महादेव की यात्रा भी करता था। अब वे हर वर्ष सुल्तानगंज से 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबाधाम पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं।
कांवरियों ने बताया कि 100 किलो वजनी इस डोली कांवर को एक बार में चार श्रद्धालु कंधे पर उठाते हैं और पूरे मार्ग में 26 सदस्य बारी-बारी से इसे लेकर चलते हैं। श्रद्धा, कला और भक्ति का अद्भुत प्रतीक बना यह अर्धनारीश्वर डोली कांवर इस बार के श्रावणी मेले में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
बाइट-कार्तिक मंडल कांवरिया
बाइट-रौशन साव कांवरियां
बाइट-आकाश सिंह कांवरिया



