मुजफ्फरपुर-ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन!

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:- रवि शंकर अमित!

स्थानीय ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय में “मिथ, सोसायटी एंड कल्चरल नैरेटिव्स इन इंडियन इंग्लिश लिटरेचर” (भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य में मिथक, समाज और सांस्कृतिक आख्यान) विषयक दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए संगोष्ठी के मुख्य अतिथि सह उद्घाटनकर्ता बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति (प्रो) डॉ दीनेश चन्द्र राय ने कहा कि सभ्यता सिर्फ़ स्मारकों से नहीं अपितु अपनी कथाओं के कारण याद की जाती हैं। कई साम्राज्यों का पतन हो गया, राजनीतिक प्रथाएं परिवर्तित हो गईं, तकनीक प्रचलन से बाहर हो गई परंतु मिथक एवं कथाएं आज भी अस्तित्व में हैं। राम और कृष्ण जैसे रामायण, महाभारत के पात्र हमें कर्तव्य, त्याग, नेतृत्व, नैतिक जिम्मेदारी आदि की सीख देते हैं। राजा राव, आर के नारायण, सलमान रश्दी, अमिताव घोष सरीखे समकालीन रचनाकारों के अंग्रेजी साहित्य में मिथ, समाज और संस्कृति की जीवंतता परिलक्षित होती हैं। मुझे भरोसा है कि यह दो दिवसीय संगोष्ठी साहित्य और संस्कृति के अध्ययन के साथ-साथ अकादमिक उन्नति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

अपने बीज वक्तव्य के माध्यम से एस पी एस बी ए विश्वविद्यालय सऊदी अरब से पधारे डॉ त्रिभुवन कुमार ने कहा कि जीवन के उत्थान-पतन, हर्ष-विषाद साहित्य के सृजन का मूलाधार हैं। दुनिया के समस्त साहित्य में सांस्कृतिक मुक्ति की व्यापक रूप में मुखर है। मंजू कपूर, मुल्क राज आनंद, रोहिंटन मिस्त्री, रस्किन बॉन्ड, अनिता देसाई, अरुंधती रॉय, झुंपा लाहिरी सरीखे भारतीय अंग्रेज़ी साहित्यकारों ने भारतीय समाज के सांस्कृतिक स्वरूप, उसके मनोविज्ञान एवं युवामन की भावनाओं एवं मानवीय संबंधों को पूरी शिद्दत के साथ रेखांकित किया है। यह संगोष्ठी नई शिक्षा नीति के आलोक में अकादमिक मूल्य एवं नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देगी ऐसा विश्वास है।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो (डॉ) ममता रानी ने अपने स्वागत उद्गार एवं संगोष्ठी की प्रस्तावना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय अंग्रेजी साहित्यकारों ने रामायण, महाभारत, पुराणों, लोकगीत, लोककथाओं से प्रेरणा लेकर समकालीन समाज और सांस्कृतिक पहचान सरीखे विषयों को नई दृष्टि से अभिव्यक्त किया है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य अकादमिक मूल्य संवर्धन के साथ-साथ इस परंपरा को नई पीढ़ी को हस्तांतरित करना है।

उद्घाटन सत्र के बाद बिहार विश्वविद्यालय अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो (डॉ) अनिता सिंह की अध्यक्षता में आयोजित पूर्ण सत्र/पूर्ण अधिवेशन (Plenary Session) में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो (डॉ) प्रवीण कुमार अंशुमान ने भारतीय अंग्रेजी साहित्य में मिथक, समाज और संस्कृति पर विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि भारतीय साहित्य अपने दर्शन, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के कारण ही विश्व साहित्य से भिन्न है।

पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना के प्रो (डॉ) शिव कुमार यादव ने अपने उद्बोधन में भारतीय संस्कृति के संदर्भ में शशि थरूर की पुस्तक का हवाला देते हुए हिंदुत्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य का लक्ष्य परहित, उदारता एवं मनुष्यता को स्थापति करना है।

उद्घाटन सत्र का संचालन महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक एवं संगोष्ठी के संयोजक डॉ जीतेंद्र कुमार मिश्रा एवं धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक एवं संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ संतोष कुमार ने किया।

इसके पूर्व अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया गया। आगत अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। मौके पर संगोष्ठी पर आधारित स्मारिका का विमोचन किया गया। आरंभ विश्वविद्यालय कुलगीत एवं समापन राष्ट्रगान से किया गया। इस सत्र का संचालन डॉ दूर्वादल भट्टाचार्य एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ शगुफ्ता नाज़ ने किया।

संगोष्ठी के तीन समानांतर तकनीकी सत्रों (Parellel Technical Session) में देश एवं विदेश के लगभग दो सौ शिक्षकों, डेलीगेट्स, शोधार्थियों एवं छात्र/ छात्राओं द्वारा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मोड में संगोष्ठी केंद्रित विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।

संगोष्ठी में प्रो (डॉ) देवव्रत प्रसाद, प्रो (डॉ) नीलिमा झा, डॉ विनीता झा, प्रो (डॉ) रवि कुमार सिन्हा, प्रो (डॉ) मधुर कुमार, डॉ इकबाल हुसैन, डॉ चितरंजन कुमार, डॉ राकेश कुमार, डॉ ज्योति कुमारी, डॉ पंकज कुमार नीरज, डॉ विनम्रता सिंह, डॉ ललितप्रभा, डॉ शगुफ्ता नाज़, डॉ धर्मराज कुमार आदि की उपस्थिति रही।

डॉ अर्चना सिंह, डॉ साक्षी वर्मा, कुंदन कुमार, वर्तिका तिवारी, कुंदन कुमार, सुल्तान अली, पुष्कर सत्यम, मृगांक रंजन, आदि ने संगोष्ठी को सफल बनाने में अपनी महती भूमिका निभाई।

संगोष्ठी के आयोजन में महाविद्यालय के साथ-साथ एस के एस महिला महाविद्यालय, मोतिहारी, महिला शिल्प कला भवन महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर एवं रॉय ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन ने सहयोगी संस्थान के रूप में अपनी भूमिका निभाई।

बाइट- ममता रानी प्राचार्य LNT महाविद्यालय मुजफ्फरपुर

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