:- रवि शंकर अमित/बबलू राय!
जहां आज भी समाज के कई हिस्सों में बेटी के जन्म पर मायूसी छा जाती है, वहीं बेगूसराय के एक परिवार ने ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। बेटी के जन्म की खुशी में परिवार ने एम्बुलेंस को फूलों से सजाया, डीजे बजाया और नवजात के स्वागत में पूरे गांव को जश्न में शामिल कर लिया। यह अनोखा नजारा अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान को एक नई मिसाल देता नजर आ रहा है। आपको बताते चले कि बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड अंतर्गत रुदौली गांव के वार्ड संख्या-11 निवासी राम उदय सहनी के घर बेटी के जन्म के बाद खुशियों का ऐसा माहौल देखने को मिला, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बछवाड़ा से छुट्टी मिलने के बाद परिवार ने एम्बुलेंस को फूलों से सजाया और डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए मां और नवजात बच्ची को पूरे सम्मान के साथ घर लेकर पहुंचे।रास्ते में डीजे की आवाज सुनकर बड़ी संख्या में लोग जुट गए। पहले लोगों को लगा कि कोई बारात या बड़ा समारोह निकल रहा है, लेकिन जब पता चला कि यह जश्न एक बेटी के जन्म का है, तो हर कोई परिवार की सोच और पहल की सराहना करने लगा।
परिवार के सदस्य रामप्रवेश सहनी ने बताया कि उनके संयुक्त परिवार में पहले से पांच बेटे हैं, लेकिन पहली बार बेटी का जन्म हुआ है। इसी खुशी को यादगार बनाने के लिए पूरे परिवार ने मिलकर भव्य स्वागत करने का फैसला किया।
नवजात की मां ने अपनी बेटी का नाम “रचना” रखा है। परिवार का कहना है कि यह बेटी उनके घर की “लक्ष्मी” बनकर आई है और उसे बेटों के समान हर अधिकार, हर अवसर और बेहतर शिक्षा दी जाएगी।गांव के लोगों ने भी इस पहल की जमकर प्रशंसा की। लोगों का कहना है कि जिस समाज में आज भी कई जगह बेटियों के जन्म पर लोग निराश हो जाते हैं, वहां इस परिवार ने बेटी के जन्म को उत्सव बनाकर समाज को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया है।बेटी के जन्म पर मनाया गया यह अनोखा जश्न अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि समाज के लिए यह संदेश भी है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि परिवार की सबसे बड़ी खुशियां और भविष्य की सबसे मजबूत नींव होती हैं।
बाइट:रामप्रवेश सहनी (परिजन)
बाइट नवजात की मां




