रिपोर्टर– राजीव कुमार झा!
मधुबनी जिले के कलुआही थाना क्षेत्र अंतर्गत राढ गांव में बिषैला सांप के डंसने से एक 68 वर्षीय महिला की मौत हो गई। सांप डंसने की जानकारी होते ही परिजनों ने महिला को तत्काल कलुआही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ( पी एच सी ) पहुंचाया, जहां से गंभीर स्थिति बताकर महिला को सदर अस्पताल मधुबनी रेफर कर दिया गया। सदर अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में कलुआही पी एच सी को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि क्या हर गंभीर मरीज को रेफर कर देना ही यहां इलाज का विकल्प बन गया है। कलुआही के उप प्रमुख चंदन प्रकाश यादव का कहना है कि पीएचसी में गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद अक्सर सदर अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल में पर्याप्त एंटी-स्नेक वेनम ( ए एस भी ), आवश्यक दवाएं, प्रशिक्षित चिकित्सक और आपातकालीन उपचार की बेहतर व्यवस्था होती, तो कई मरीजों को समय पर इलाज मिल सकता था। वही स्थानीय लोगों का कहना है कि रेफर की प्रक्रिया में बहुमूल्य समय निकल जाता है और कई मामलों में मरीज रास्ते में या बड़े अस्पताल पहुंचने के बाद दम तोड़ देते हैं। हालांकि, इस मामले में यह आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है कि महिला की मृत्यु रेफर किए जाने के कारण ही हुई। फिर भी लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की खास्ता स्थिति पर गंभीर बहस खड़ी कर दी है।
लोगों के द्वारा उठाए जा रहे गंभीर सवाल ये कि क्या कलुआही पीएचसी में एंटी-स्नेक वेनम ( ए एस भी ) की पर्याप्त उपलब्धता है?। क्या गंभीर मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक संसाधन और विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद हैं?।
आखिर कब तक हर गंभीर मरीज को सदर अस्पताल रेफर किया जाता रहेगा?। पी एच सी मे लोगों को समय पर जीवनरक्षक उपचार कब मिलेगा?। महिला चिकित्सक के खाली पड़े जगह को कब भरने की प्रक्रिया किया जाएगा?।
क्षेत्र के लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि कलुआही पीएचसी को जीवनरक्षक दवाओं, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, पर्याप्त चिकित्सकों और आपातकालीन उपचार की बेहतर सुविधाओं से सुसज्जित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।




