दरभंगा संवाददाता:- लक्ष्मण कुमार!
दरभंगा जिला परिषद में महाधरना से मचा सियासी भूचाल: अध्यक्ष पर गंभीर आरोप, 10 सूत्री मांगों को लेकर सदस्यों का शक्ति प्रदर्शन, आत्मदाह की चेतावनी
दरभंगा, 11 जुलाई। दरभंगा जिला परिषद में लंबे समय से चल रहे अंदरूनी विवाद ने शनिवार को खुलकर राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया। जिला परिषद के कई निर्वाचित सदस्य 10 सूत्री मांगों को लेकर जिला परिषद परिसर में एक दिवसीय महाधरना पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने जिला परिषद अध्यक्ष पर विकास योजनाओं में मनमानी, पक्षपात और कार्यों को जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। धरना की पूर्व सूचना प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और उप विकास आयुक्त को दी गई थी।
धरना का नेतृत्व कर रहे जिला परिषद सदस्य धर्मेंद्र कुमार झा ने कहा कि जिला परिषद की विकास योजनाओं को योजनाबद्ध तरीके से रोका जा रहा है, जिससे पूरे जिले में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 15वें एवं 16वें वित्त आयोग की अनेक योजनाएं आज भी पोर्टल पर लंबित हैं। तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति समय पर नहीं दी जा रही है, जबकि पहले से स्वीकृत 148 योजनाओं का कार्यादेश भी अब तक जारी नहीं किया गया। इसके कारण विकास कार्य ठप पड़े हैं और मजदूरों के साथ-साथ सामग्री आपूर्तिकर्ताओं का लाखों रुपये का भुगतान महीनों से अटका हुआ है।
धर्मेंद्र कुमार झा ने आरोप लगाया कि जिला परिषद अध्यक्ष रेणु देवी के कार्यभार संभालने के बाद योजनाओं के चयन, स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं की स्वीकृति और भुगतान अध्यक्ष के निर्देश पर रोक दिए गए, जिससे विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हुए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिला परिषद की सामान्य बैठकों में बिहार पंचायत राज अधिनियम की भावना के अनुरूप कार्य नहीं किया जा रहा तथा सदस्यों की राय को नजरअंदाज किया जा रहा है।
धरनार्थियों ने प्रशासन से मांग की कि सभी लंबित योजनाओं का शीघ्र निष्पादन कराया जाए, तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति तत्काल दी जाए, मजदूरों एवं आपूर्तिकर्ताओं के बकाया भुगतान का निपटारा किया जाए तथा जिला परिषद अध्यक्ष के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
धरना के दौरान धर्मेंद्र कुमार झा ने भावुक होते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि जिला परिषद में भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और कथित अनियमितताओं पर रोक नहीं लगी तथा सभी जिला परिषद सदस्यों की लंबित योजनाओं का भुगतान जल्द नहीं हुआ, तो वे आत्मदाह करने को मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जनप्रतिनिधियों की आवाज लगातार दबाई जा रही है और यदि प्रशासन ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों की होगी।
महाधरना में जिला परिषद उपाध्यक्ष अरुणा कुमारी, सदस्य लाल कुमार सिंह, मोहम्मद हकीकूल, सुमित्रा देवी, अंजू देवी सहित बड़ी संख्या में जिला परिषद सदस्य एवं समर्थक मौजूद रहे।
जिला परिषद परिसर में हुए इस महाधरना के बाद जिले की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई और धरनार्थियों की मांगों पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं।
- बाइट:/ धर्मेंद्र कुमार झा, जिला परिषद सदस्य,




