सुपौल- कोशी के तांडव से बेघर हुये दर्जनों परिवार, खुले आसमान के नीचे जीने को विवश!

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रिपोर्ट :- संतोष चौहान!

बेला गोठ गांव में दर्जनों परिवारों के घर कोशी नदी में समाए, कटाव जारी, खुले आसमान के नीचे जीवन बसर करने को मजबूर हैं लोग

सुपौल :- उत्तर बिहार की जीवनरेखा कही जाने वाली कोशी नदी एक बार फिर अपने रौद्र रूप में आ चुकी है। जिले के किशनपुर प्रखंड अंतर्गत दुबियाही पंचायत के बेला गोठ गांव में कोशी नदी का कटाव भयावह रूप लेती जा रही है। अब तक करीब दो दर्जन से ज्यादा परिवार के घर कोशी की धारा में समा चुके हैं, जबकि कई अन्य घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है।ग्रामीणों के मुताबिक, कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि लोगों को अपना सामान समेटने तक का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। कुछ दिन पहले तक जिन आंगनों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ मलबा और कोशी की गर्जना सुनाई दे रही है। कई परिवार अपनी आंखों के सामने वर्षों की मेहनत और जीवनभर की पूंजी को नदी में बहते देखने को मजबूर हैं। कटाव से प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुनर्वास की है। जिनके घर उजड़ चुके हैं, उनके पास बसने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। मजबूरन लोग बचा-खुचा सामान लेकर गांव के ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।बरसात के मौसम में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गई है, जबकि भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी गंभीर समस्या बन चुकी है।ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने कटाव प्रभावित क्षेत्र का दौरा तो किया, लेकिन राहत और बचाव के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बांस की पायलिंग, तट सुरक्षा और अन्य कटाव निरोधी उपाय किए जाते, तो कई घरों और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि को बचाया जा सकता था। कोशी नदी का संकट केवल बेला गोठ तक सीमित नहीं है। किशनपुर प्रखंड के मौजहा पंचायत के बगहा क्षेत्र में भी कटाव तेजी से बढ़ रहा है। वहीं जिले के सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड की ढोली पंचायत के सियानी एवं ढोली गांवों में भी कोशी नदी की तेज धारा लगातार जमीन काट रही है।
हालात इतने गंभीर हैं कि कई परिवार पूरी रात जागकर नदी की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं, ताकि अचानक कटाव बढ़ने की स्थिति में अपने परिजनों और सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके। हर साल बाढ़ और कटाव की त्रासदी झेलने वाले कोशी क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उन्हें सिर्फ राहत सामग्री नहीं, बल्कि सुरक्षित पुनर्वास, स्थायी कटावरोधी कार्य और भविष्य की सुरक्षा की जरूरत है। इधर, सामाजिक संगठन कोशी नव निर्माण मंच ने भी कटाव प्रभावित परिवारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल पुनर्वास, क्षति मुआवजा, राहत शिविर, तिरपाल, पेयजल, शौचालय और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। बेला गोठ, बगहा, सियानी और ढोली के उजड़े घर आज एक ही सवाल पूछ रहे हैं,आखिर कब तक कोशी हर साल लोगों के सपनों और आशियानों को बहाती रहेगी और कब तक लोग अपने ही घरों में बेघर होने को मजबूर होते रहेंगे?

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