दिव्यांगता के बावजूद जहानाबाद के बिकास ने BPSC में प्राप्त की सफलता, बने प्रखंड बिकास पदाधिकारी!

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रिपोर्ट – पंकज कुमार!

हौसला बुलंद हो तो सफलता के रास्ते में शारीरिक चुनौतियां कभी बाधा नहीं बन सकती ,मेहंदी के दिन मिली खुशी

हौसला बुलंद हो तो सफलता के रास्ते में शारीरिक चुनौतियां कभी बाधा नहीं बन सकती हैं. बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले विकास ने इसको साबित कर दिखाया है. उन्होंने एक या दो नहीं, बल्कि कई उपलब्धियां हासिल की है. अब तो बिहार की सबसे प्रतिष्ठित बीपीएससी परीक्षा पास कर अधिकारी बन गए हैं. सबसे खास बात यह है कि वो उस दिन अधिकारी बने, जिस दिन उनका मेहंदी रस्म हो रहा था. एक तरफ शादी की खुशियां तो दूसरी ओर अधिकारी बनने का सपना. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में सफलता हासिल कर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) का पद प्राप्त किया है.बता दें कि विकास कुमार जहानाबाद जिला मुख्यालय से 6 किमी दूर डेढ़सैया गांव के रहने वाले हैं. वह दोनों पैर से दिव्यांग हैं. उनकी माता भी इस दुनिया में अब नहीं हैं, लेकिन अगर कुछ साथ है तो उनका जुनून और हौसला. इस जुनून ने न सिर्फ उनको एक अधिकारी बनाया है, बल्कि गांव और समाज के लिए प्रेरणा बने हैं. विकास कुमार बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल करने से पूर्व पटना उच्च न्यायालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे. एक तरफ नौकरी और दूसरी तरफ खाली समय में पढ़ाई के जज्बे ने उन्हें बड़ी उपलब्धि दिलाई है.विकास कहते हैं कि सबकी तरह वह सामान्य नहीं थे, लेकिन उनका परिवार, समाज और गांव ने कभी यह महसूस नहीं होने दिया, हम ऐसा नहीं कर सकते हैं. शुरुआती शिक्षा दीक्षा गांव के पास के एक स्कूल से हुई. इसके बाद IIT की तैयारी के लिए पटना में एक निजी कोचिंग पकड़ा. पिताजी का साथ हर कदम मिलता गया. हम जब कोचिंग जाते तो पिताजी साइकिल से ले जाया करते थे. स्कूल के दौर से ही पिताजी का भरपूर सहयोग मिला. विद्यालय से लेकर कोचिंग तक पिताजी ने साइकिल पर बिठाकर लाने और ले जाने का कार्य किया. IIT क्रैक करने के बाद फिर कुछ समय के लिए दिल्ली सिविल सर्विस की तैयारी करने गया.विकास आगे बताते हैं, “कोरोना के दौरान घर आना पड़ा. इसके बाद सरकारी नौकरी की तैयारी में लग गया. इसी बीच पटना उच्च न्यायालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर पद पर बहाल हो गया. अब नौकरी के साथ साथ सिविल सर्वेंट बनने का सपना पूरा करना था. निरंतर प्रयास करता रहा. दो बार साक्षात्कार में पिछड़ गया, लेकिन फिर भी हार नहीं मानी. इस बार कठिन परिश्रम किया और बीपीएससी परीक्षा पास कर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) बने हैं. यह हमारे माता पिता, समाज और गांव के लोगों का ही सहयोग है. जब हमें पटना उच्च न्यायालय में नौकरी मिली तो 22वें दिन हमारी माता नहीं रही और इस दुनिया को छोड़ गईं.”चाचा मुकेश कुमार ने बताया कि विकास बहुत जूनियर है. दिव्यांग तो था, लेकिन हम लोगों के कभी ऐसा महसूस नहीं होने दिया कि वो दिव्यांग खेल कूद हो या पढ़ाई लिखाई, हर कदम एक समान तरीके से ट्रीट किया और उसी का नतीजा है कि वो इतना बड़ा सम्मान प्राप्त किया है. शुरुआत से ही विकास मेधावी छात्र रहा है.

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