आरा/आशुतोष पाण्डेय
आरा (भोजपुर)। भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड अंतर्गत गंगा नदी पर बने महुली पीपा पुल पर प्रतिबंध के बावजूद भारी वाहनों का परिचालन धड़ल्ले से जारी है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग इस पुल के माध्यम से बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन करते हैं। यह पुल मुख्य रूप से छोटे वाहनों एवं आम नागरिकों के आवागमन के लिए बनाया गया है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर बड़े वाहनों और ओवरलोड बालू लदे ट्रैक्टरों का परिचालन लगातार किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक बालू माफिया सक्रिय रहते हैं। सोन नदी से निकाली गई बालू को ओवरलोड ट्रैक्टरों के जरिए महुली पीपा पुल पार कर उत्तर प्रदेश के बलिया, मऊ तथा अन्य कस्बों तक पहुंचाया जाता है। लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार में कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत भी होने की चर्चा है, जिसके कारण कार्रवाई नहीं हो पाती।
ओवरलोड वाहनों से पुल की स्थिति हो रही खराब
जानकारों के अनुसार पीपा पुल पर भारी वाहनों के परिचालन से इसकी संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। लगातार ओवरलोड बालू ढुलाई के कारण पुल की स्थिति दिन-ब-दिन जर्जर होती जा रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकारी कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद जारी है खेल
पुल की सुरक्षा और देखरेख के लिए जिला प्रशासन द्वारा सरकारी कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके बावजूद ओवरलोड वाहनों का परिचालन नहीं रुक रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
सरकार को हो रहा दोहरा नुकसान
अवैध बालू परिवहन के कारण सरकार को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक ओर राजस्व की क्षति हो रही है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए पीपा पुल की उम्र भी घट रही है। क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से अविलंब जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने तथा पीपा पुल पर भारी वाहनों के परिचालन पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है।




