मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद बड़ा खुलासा: बिना नक्शा पास कराए खड़ा किया गया प्रसाद हॉस्पिटल!

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रिपोर्ट – संतोष तिवारी!

मुजफ्फरपुर। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में गुरुवार को हुई भीषण आग की घटना के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। तिरहुत कमिश्नर के निर्देश पर नगर निगम की प्रशासनिक और तकनीकी टीम ने अस्पताल परिसर में गहन जांच की। जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पूरे सिस्टम पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि प्रसाद हॉस्पिटल की पूरी बिल्डिंग बिना नगर निगम से नक्शा स्वीकृत कराए ही बना ली गई। टीम द्वारा स्वीकृत भवन नक्शा मांगे जाने पर अस्पताल प्रबंधन कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। नगर निगम के रिकॉर्ड में भी इस अस्पताल से जुड़ा कोई नक्शा दर्ज नहीं मिला।

नगर आयुक्त ने मामले की गहराई से जांच के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और इंजीनियरों की एक संयुक्त टीम बनाई है, जो जिला प्रशासन के सहयोग से विस्तृत जांच कर रही है। शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि अस्पताल की सभी इमारतें भवन उपनियमों के विरुद्ध बनाई गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, अस्पताल का निर्माण वर्ष 2009 से 2013 के बीच हुआ था। उस समय नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा अधिकृत आर्किटेक्ट्स को ही नक्शा पास करने का अधिकार था। अस्पताल प्रबंधन ने बैंक से ऋण लेने के लिए पटना के एक आर्किटेक्ट से नक्शा स्वीकृत तो कराया, लेकिन यह केवल कागजों तक सीमित रहा। वास्तविक निर्माण के दौरान नियमों की जमकर अनदेखी की गई। जब अनियमितताएं सामने आईं, तो उस आर्किटेक्ट ने दोबारा स्वीकृति देने से इनकार कर दिया।

जांच में यह भी पता चला कि शुरू में केवल अस्पताल के सामने वाले हिस्से का निर्माण किया गया था, लेकिन बाद में बिना किसी स्वीकृति के पीछे की ओर बड़े पैमाने पर विस्तार कर लिया गया। इस नए निर्माण के लिए भी नगर निगम से कोई अनुमति नहीं ली गई।

आईसीयू में आग लगने की घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। जांच में पाया गया कि अस्पताल में न तो उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था थी और न ही फायर सेफ्टी के जरूरी मानकों का पालन किया गया था।

नगर निगम सूत्रों के अनुसार, यदि विस्तृत जांच रिपोर्ट में भवन उपनियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर सकता है। साथ ही, अवैध रूप से निर्मित पूरी बिल्डिंग पर बुलडोजर चलाने का आदेश भी दिया जा सकता है।

इस पूरे मामले ने न केवल अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है और क्या इस तरह की लापरवाही को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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