डीएम ने IOCL,BPCL एवं HPCL के अधिकारीयों संग पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के वितरण व आपूर्ति की समीक्षा की!

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:- रवि शंकर अमित!

जिला पदाधिकारी बेगूसराय श्री श्रीकांत शास्त्री की अध्यक्षता में जिले में कार्यरत तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड एवं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एलपीजी गैस आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में गैस उपभोक्ताओं तक समय पर सिलेंडर उपलब्ध कराने, लंबित बुकिंग को कम करने तथा वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने को लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए।

समीक्षा के दौरान जिला पदाधिकारी ने कहा कि एलपीजी गैस आम नागरिकों से जुड़ी अत्यंत आवश्यक सेवा है, इसलिए किसी भी परिस्थिति में आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी गैस एजेंसियों को निर्देश दिया कि उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जाए तथा बैकलॉग को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

जिले में वर्तमान में कुल 22,259 सिलेंडरों का स्टॉक उपलब्ध है, जिले का औसत बैकलॉग 3.7 दिन दर्ज किया गया है। समीक्षा के दौरान पाया गया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अंतर्गत सर्वाधिक 40 वितरक कार्यरत हैं, जिसकी कुल चालू बुकिंग 30,536 एवं स्टॉक 8,966 सिलेंडर है। कंपनी का बैकलॉग 4.1 दिन दर्ज किया गया। 15 मई को 7,134 बुकिंग के विरुद्ध 7,364 सिलेंडरों की डिलीवरी की गई।

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अंतर्गत 15 वितरक कार्यरत हैं। इसकी कुल चालू बुकिंग 14,806 एवं उपलब्ध स्टॉक 9,359 सिलेंडर दर्ज किया गया। कंपनी का बैकलॉग 3.8 दिन पाया गया। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अंतर्गत 12 वितरक कार्यरत हैं, जिसकी कुल चालू बुकिंग 5,854 एवं उपलब्ध स्टॉक 3,934 सिलेंडर है। HPCL का बैकलॉग सबसे कम 3.1 दिन दर्ज किया गया।

जिला पदाधिकारी श्री श्रीकांत शास्त्री ने निर्देश दिया कि जिन एजेंसियों में डिलीवरी की गति अपेक्षाकृत कम है, वे अपने लॉजिस्टिक्स सिस्टम को और सुदृढ़ करें तथा आवश्यकता अनुसार डिलीवरी वाहनों एवं कर्मियों की संख्या बढ़ाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एलपीजी जैसी आवश्यक सेवा में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक के अंत में जिला पदाधिकारी ने आपूर्ति शाखा के पदाधिकारियों को नियमित रूप से गैस एजेंसियों का औचक निरीक्षण करने तथा कालाबाजारी, कृत्रिम कमी अथवा उपभोक्ताओं की शिकायतों के मामलों में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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