रिपोर्ट :- संतोष चौहान, सुपौल
सुपौल:- जिले में युवाओं ने दिखाया विरासत सहेजने की अनुठी पहल जिला प्रशासन सुपौल की अपील और ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत सुपौल की गौरवशाली बौद्धिक विरासत को सहेजने के अभियान ने जोर पकड़ लिया है। जिलाधिकारी सावन कुमार के आह्वान पर जिले के युवाओं ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए सदियों पुरानी पांडुलिपियों को खोज निकालने में सफलता हासिल की है।
युवाओं का सराहनीय योगदान ने ज्ञान भारतम, मिशन को चार चांद लगा दिया है।इसी कड़ी में
संगीत शिक्षिका दीपिका चंद्रा और ‘माय भारत’ के पूर्व युवा वालंटियर इन्दल कुमार ने इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए 20 महत्वपूर्ण पांडुलिपियाँ खोजकर अपने जिले की सभ्यता, ज्ञान तथा पहचान रूपी बौद्धिक विरासत को सहेजने और उसे भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने में अतुलनीय योगदान दिया है। ये पांडुलिपियाँ जिले के मलाढ़ निवासी कृपानंद झा तथा सेवा निवृत्त शिक्षक बिमलानंद झा के संग्रह से प्राप्त की गई हैं।

खोज के दौरान प्राप्त ये पांडुलिपियाँ संस्कृत एवं मिथिलाक्षर में लिखित हैं, जो लगभग 153 वर्ष से अधिक पुरानी बताई जा रही हैं।
इनकी महत्वता- ये केवल कागज के दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि तत्कालीन सुपौल की बौद्धिक उन्नति, लेखन कला और उस समय की तकनीकी समझ (लेख्य सामग्री तैयार करने की विधि) का जीवंत प्रमाण हैं।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी तारकेश्वर प्रसाद ने कहा कि इस खोज का मुख्य लक्ष्य इन अनमोल धरोहरों को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना और अपनी पहचान को जीवित रखना है।
उप विकास आयुक्त सुश्री सारा अशरफ ने युवाओं की इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को खोजने की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। जिले के अन्य युवाओं को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए और ज्ञान भारतम् मिशन में अपना बहुमूल्य योगदान देना चाहिए।
जिलाधिकारी सावन कुमार ने जिले के समस्त नागरिकों, विद्वानों, शिक्षकों, समाजसेवियों और छात्र-छात्राओं से अपील की है कि अप्रकाशित ज्ञान को लाएं सामने। विभिन्न संस्थाओं, मठों, मंदिरों, मस्जिदों, पुस्तकालयों और व्यक्तिगत संग्रहों में सुरक्षित हस्तलिखित पांडुलिपियों को प्रकाश में लाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
सुपौल जिला प्रशासन की यह मुहिम न केवल इतिहास को संरक्षित कर रही है, बल्कि आधुनिक पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का एक बड़ा मंच भी प्रदान कर रही है।




