रिपोर्ट- अमित कुमार!
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज एक बार फिर भारी हंगामा देखने को मिला। महागठबंधन के सभी विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर यूजीसी कानून लागू करने की मांग को लेकर सदन में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान विधायकों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
विधायकों का कहना था कि प्रधानमंत्री द्वारा पूरे देश में जातीय जनगणना कराने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
वहीं, भाकपा माले के विधायक अजय सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला की हत्या के बाद देशभर में छात्र आंदोलन हुए, लेकिन आज भी दलितों और पिछड़ी जातियों पर अत्याचार जारी है।
अजय सिंह ने आरोप लगाया कि शैक्षणिक और मेडिकल संस्थानों में जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि एक सदस्यीय आयोग की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वीकार किया था, फिर भी यूजीसी कानून को अब तक लागू नहीं किया गया। संस्थानों द्वारा आरक्षण को लगातार कमजोर किया जा रहा है।
अजय सिंह ने बिहार में हुई जातीय जनगणना और आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में आरक्षण की सीमा 65 प्रतिशत की गई थी, लेकिन इसे कोर्ट के माध्यम से रोक दिया गया। उन्होंने मांग की कि पूरे देश में आरक्षण व्यवस्था को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए, तभी यह पूरी तरह लागू हो सकेगा।
भाकपा माले विधायक ने कहा कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की है, क्योंकि वे भाजपा के साथ सरकार चला रहे हैं। यदि सरकार आरक्षण और यूजीसी कानून को लागू नहीं करती है, तो आंदोलन का रास्ता और तेज किया जाएगा।
बाइट :
भाकपा माले विधायक अजय सिंह




