धोबी समाज में अब मृत्यु भोज का नहीं रहेगा दबाव, जयनगर में महासंघ का बड़ा फैसला!

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रिपोर्टर — राजीव कुमार झा!

जयनगर में धोबी समाज की ऐतिहासिक पहल— मृत्यु भोज पर सामाजिक दबाव पर रोक

भोज नहीं, भावना महत्वपूर्ण— धोबी महासंघ का समाज सुधारक निर्णय, “स्वेच्छा से करें भोज, बाध्यता नहीं

मधुबनी अखिल भारतीय धोबी महासंघ, जयनगर इकाई की बैठक में समाज सुधार को लेकर एक अहम फैसला लिया है। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय किया गया कि अब धोबी समाज में मृत्यु भोज आयोजित करने को लेकर किसी भी तरह का सामाजिक या सामूहिक दबाव नहीं बनाया जाएगा। यह पहल समाज में अनावश्यक खर्च और दिखावे की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि किसी व्यक्ति की आर्थिक और सामाजिक क्षमता उसकी निजी बात है, इसलिए किसी को समाज या संगठन की ओर से भोज करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अगर किसी परिवार या व्यक्ति की इच्छा हो तो वे अपनी स्वेच्छा से भोज का आयोजन कर सकते हैं, लेकिन इसे परंपरा या सामाजिक अनिवार्यता के रूप में नहीं देखा जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य समाज में समानता, आपसी सहयोग और व्यर्थ खर्च से बचाव को बढ़ावा देना है। सगंठन के सदस्यों ने बताया कि पिछली कुछ वर्षों में समाज में मृत्यु भोज पर अत्यधिक खर्च किए जाने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार लोग सामाजिक दबाव में आकर अपनी सामर्थ्य से अधिक खर्च करते हैं, जिससे परिवारों पर कर्ज का बोझ भी आ जाता है। इस स्थिति को देखते हुए महासंघ ने इस विषय पर गंभीर विचार-विमर्श किया और अंततः सामूहिक सहमति से यह निर्णय लिया गया। बैठक में मुख्य रूप से संगठन और संघ के वरिष्ठ सदस्य बुद्धू साफी, राजेश साफी, पप्पू साफी, रंजीत साफी, शंकर साफी, विजय साफी, उपेंद्र साफी और संजय साफी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि इस निर्णय का पालन पूरे समाज में सुनिश्चित किया जाएगा और इसके प्रचार-प्रसार के लिए गांव और मुहल्ला स्तर पर जनजागरण अभियान भी चलाया जाएगा। बैठक के दौरान कई सदस्यों ने सुझाव दिया कि भविष्य में भी समाज सुधार से जुड़े विषयों पर नियमित चर्चा की जानी चाहिए, ताकि धोबी समाज में शिक्षा, एकता और प्रगतिशील सोच को और आगे बढ़ाया जा सके। अंत में महासंघ की ओर से यह अपील की गई कि सभी लोग इस निर्णय का सम्मान करें और समाज में अनावश्यक खर्च की परंपरा खत्म करने में सहयोग दें, ताकि एक सशक्त और समानता-आधारित समाज का निर्माण किया जा सके।

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