भागलपुर से धीरज शर्मा की रिपोर्ट!

बिहार, यूपी, महाराष्ट्र, दिल्ली सहित कई राज्यों के वक्ताओं ने रखे अपने विचार!
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गांधी विचार विभाग में शनिवार को गांधी जयंती के उपलक्ष्य में युवा चुनौतियाँ और गांधी विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उदघाटन टीएमबीयू के प्रतिकुलपति प्रो. रमेश कुमार ने किया।
राष्ट्रीय सेमिनार की अध्यक्षता प्रख्यात गांधीवादी चिंतक और पूर्व सांसद व पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ रामजी सिंह ने ऑनलाइन मोड में की। उन्होंने कहा कि सेमिनार का विषय अत्यंत ही ज्वलन्त, सामयिक और प्रासंगिक है। सेमिनार से निकले निष्कर्ष समाज का उत्थान और युवाओं को एक नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने सेमिनार की सफलता की कामना की।
जबकि विषय प्रवेश और अतिथियों का स्वागत गांधी विचार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विजय कुमार ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत गांधी विचार विभाग परिसर में स्थित बापू की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजली से हुआ। इसके बाद विभाग के स्वराज कक्ष में सर्वधर्म प्रार्थना भी हुआ।
सेमिनार को बिहार, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के वक्ताओं ने संबोधित किया।
ऑनलाइन मोड में सेमिनार का उदघाटन करते हुए तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. रमेश कुमार ने कहा कि महात्मा गांधी का जीवन दर्शन अनुकरणीय है। गांधी के विचारों से नई पीढ़ी खासकर युवाओं को सीख और प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मोहनदास करमचंद गाँधी के नाम से जन्म लेने वाले महान शख्स बापू और राष्ट्रपिता के नाम से प्रसिद्ध हुए।
उन्होंने अपने महान व्यक्तित्व और कृतित्व से दुनिया को सत्य,अहिंसा और शांति का संदेश दिया। प्रोवीसी ने कहा कि सेमिनार के माध्यम से समाज मे जन जागरूकता पैदा होगी। हमें आज गांधी के विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है। गांधी विचार की प्रासंगिकता बढ़ी है।
विशिष्ट अतिथि जेपी विश्वविद्यालय छपरा के कुलपति डॉ फारूक अली ने ऑनलाइन मोड से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गांधी विचार की प्रासंगिकता सदैव रहेगी।
जेपीयू के कुलपति प्रो. अली ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में मार्टिन लूथर किंग, दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला और म्याँमार में आंग सान सू की जैसे लोगों के नेतृत्व में दुनिया भर में कई उत्पीड़ित समाजों द्वारा लोगों को जुटाने की गांधीवादी तकनीक को सफलतापूर्वक नियोजित किया गया है, जो कि इस बात की गवाही देता है कि गांधी और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के प्रोफेसर मनोज कुमार ने कहा की समरस और समतामूलक समाज बनाने के लिए विकेन्द्रीकृत व्यवस्था के साथ युवाओं के अंदर गांधी को जीवित रखने की आवश्यकता है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी यूपी के राजनीति विज्ञान के पूर्व विभागाध्यक्ष व राजीव गांधी स्टडी सर्कल के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. सतीश कुमार ने कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गाँधीजी अक्सर कहा करते थे कि धर्म के बिना राजनीति विधवा है। धर्म का तात्पर्य नैतिक धर्म और कर्म निष्ठा से है। जिसके बल पर ही समाज में मौलिक बदलाव सम्भव है।
जेएनयू नई दिल्ली के सोशल साइंस के पूर्व अध्यक्ष प्रो. आनंद कुमार ने कहा कि इस समय दुनिया में गांधी की ललकार चारों ओर सुनाई पड़ रही है। गांधी कर्मयोगी का नाम है। गांधीवाद में ही सभी समस्याओं का निदान और युवा चुनौतियों का समाधान निहित है।
टीएमबीयू के गांधी विचार विभाग के अध्यक्ष डॉ विजय कुमार ने कहा कि आज दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि धरती का ताप, जनसंख्या का श्राप और पूंजी का पाप आज सर चढ़कर बोल रहा है। बाबजूद इसके आज युवाओं को अपने अंदर की शक्ति को पहचानने और उसे निखारने की आवश्यकता है।
समाज विज्ञान संस्थान पटना के निदेशक प्रो. अनिल कुमार राय ने कहा कि आज अगर विभिन्न चुनौतियों के विकल्प और विकास का सपना देखना है तो कृषि और ग्रामोद्योग आधारित आर्थिक विकेन्द्रीकृत व्यवस्था करनी होगी।
टीपी कॉलेज मधेपुरा के दर्शनशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुधांशु शेखर ने कहा कि जीवन की चुनौतियां विविध हैं परन्तु गांधी के विचार प्रत्युत्तर में सशक्त विकल्पों से भरा है।
सेमिनार के आयोजन सचिव एसएम कॉलेज भागलपुर के राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर व टीएमबीयू के जनसम्पर्क पदाधिकारी डॉ दीपक कुमार दिनकर ने कहा कि गांधी अतीत ही नहीं वर्तमान और भविष्य भी हैं। गाँधीमार्ग से ही समस्त मानव और मानवता का कल्याण सम्भव है। उन्होंने कहा कि सेमिनार का विषय काफी समीचीन और प्रासंगिक है। डॉ दिनकर ने कहा कि आज समाज में जो भी विकृतियां और समस्याएँ हैं उसका निराकरण गांधी के विचारों को अपनाकर ही हो सकता है। हमें गांधीवाद की ओर फिर से लौटना होगा। उन्होंने कहा कि गांधी एक व्यक्ति ही नहीं थे अपितु एक महान विचार और विचारधारा हैं। गाँधीजी ने खुद कहा था कि गांधी मर सकता है लेकिन गांधीवाद सदैव जीवित रहेगा। साथ ही गांधी यह भी कहते थे कि जो बदलाव तुम दुनिया में देखना चाहते हो, वह खुद में लेकर आओ।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि आज पूरी दुनिया में मानव समाज के सामने बढ़ती हिंसा, युद्ध के खतरे, पर्यावरणीय विनाश, ग्लोबल वार्मिंग, बेरोजगारी, बेकारी, भुखमरी, कुपोषण, राजनीतिक-प्रशासनिक भ्रष्टाचार, सतत विकास के मुद्दे, मूल्यों का क्षरण जैसी समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं। आज हमने विकास का जो मॉडल अपनाया है, उनमें युवाओं के लिए रोजगार का पर्याप्त सृजन नहीं हो पा रहा है। पर्यावरण का इस तरह अंधाधुंध दोहन हो रहा है कि यह चिंता सताने लगी है कि यह सृष्टि बचेगी या नहीं। दुनिया में अशांति व युद्ध का खतरा बढ़ रहा है। गांधी के विचार से ही इससे निजात पाया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन सेमिनार के संयोजक व गांधी विचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ उमेश प्रसाद नीरज कर रहे थे।
सेमिनार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही मोडों में आयोजित किया गया था। सेमिनार का प्रसारण यूट्यूब पर भी किया जा रहा था।
इसके पूर्व कार्यक्रम का उदघाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया।
सेमिनार में रिपोर्टियर की भूमिका गांधी विचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर गौतम कुमार निभा रहे थे।
राष्ट्रीय सेमिनार में गांधी विचार विभाग के शिक्षक डॉ रीता झा, डॉ उमेश प्रसाद नीरज, डॉ अमित रंजन सिंह, गौतम कुमार, मनोज कुमार दास, एसएम कॉलेज की शिक्षिका डॉ शेफाली, आरएस कॉलेज तारापुर के उर्दू के शिक्षक डॉ शाहिद रजा जमाल, भानु उदयन, रोशन कुमार सिंह, श्वेता सिंह, शिशिर रंजन सिंह, सौरभ त्यागी आदि ने भी अपने विचार रखे। सेमिनार में प्रतिभागियों ने वक्ताओं से सवाल भी पूछे।
ऑनलाइन कार्यक्रम की तकनीकी जिम्मेवारी रिसर्च स्कॉलर नरेन नवनीत, गौरव कुमार सिंह, चंदन कुमार कर्ण संभाल रहे थे। सेमिनार में डॉ सनोज कुमार चौधरी, डॉ राजीव रंजन, डॉ गौरी, पंकज कुमार सिंह, शिल्पी, गुंजन कुमारी, कर्ण कुमार राजा, पंकज शर्मा, राजीव कुमार, अनुज कुमार, उमेश कुमार, रामचन्द्र रविदास, रुद्र नारायण मंडल सहित बड़ी संख्या में ऑनलाईन और ऑफलाइन मोड में प्रतिभागियों ने भाग लिया।
सेमिनार में भाग लेने वाले पंजीकृत प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी निर्गत किया जाएगा।




