राजपूत समाज गोलबंद होकर राष्ट्र सेवा मैं बढ़कर हिस्सा ले – अनिल सिंह सिकरवार

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एस एन श्याम/अनमोल कुमार

पटना। राजपूत सेवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह सिकरवार ने कहा है कि देश की एकता और अखंडता के लिए राजपूत समाज ने वक्त आने पर अपना सर्वस्व निछावर कर दिया है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण भारत के राजपूतों को गोलबंद होकर राष्ट्र सेवा में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेनाचाहिए।
श्री सिकरवार झारखंड की राजधानी रांची में संगठन के एक भव्य सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मान समारोह में क्षत्रिय समाज के सिरमौर कहे जाने वाले शेर सिंह राणा ने भी शिरकत किया।
बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर भारतीय राजपूताना सेवा संगठन की बिहार-झारखंड इकाई द्वारा झारखंड के राजधानी रांची में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह सिकरवार ने विभिन्न राज्यों से पधारे संगठन के *उत्कृष्ट कार्यकर्ताओं एवं *सम्मानित पदाधिकारियों को उनके अद्वितीय योगदान के लिए बिहार झारखंड के पदाधिकारियों के द्वारा अंगवस्त्र, सम्मान पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर तथा माला पहनाकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अदम्य साहस, शौर्य और सेवा भाव के प्रतीक श्री शेर सिंह राणा जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्हें संगठन की ओर से विशेष अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव श्री प्रेम सिंह एवं राष्ट्रीय सचिव श्री वीरेंद्र सिंह की भी विशेष उपस्थिति रही, जिन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अनिल सिंह सिकरवार द्वारा सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की समस्त रूपरेखा बिहार उपाध्यक्ष श्री रामपुकार सिंह द्वारा तैयार की गई, जिसमें बिहार-झारखंड के सभी पदाधिकारियों ने समर्पण एवं एकता के साथ मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

मंच संचालन की महत्वपूर्ण भूमिका संगठन के ऊर्जावान एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं संजय सिंह, सुरेश कुमार सिंह तथा अजय कुमार सिंह ने कुशलता से निभाई।

यह आयोजन संगठन की एकता, सेवा, सम्मान और कर्तव्यपरायणता की भावना का जीवंत उदाहरण बनकर उपस्थित जनों के हृदय में एक अमिट छाप छोड़ गया। इस कार्यक्रम में विशेष कर गया बिहार से भोला सिंह, मिथिलेश सिंह, उमाशंकर सिंह, पवन सिंह, अरुण सिंह, झारखंड रांची से प्रदीप कुमार सिंह धनबाद से गजेंद्र सिंह विनोद सिंह एवं अन्य कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।

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