रिपोर्टर — राजीव कुमार झा!
मधुबनी जिले के हरलाखी प्रखंड क्षेत्र में एक विद्यालय पढ़ाई के साथ साथ लोगों मे प्रर्यावरण को लेकर जागरूकता फैलाने को लेकर जबरदस्त प्रयास कर रही है। उक्त विद्यालय आज सामाजिक चेतना का केंद्र बनी हुई है। हरलाखी प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय पिपरौन आज एक ऐसी मिसाल बन चुका है, जहां दीवारें बोलती हैं, रंग संदेश देते हैं और पूरा वातावरण बच्चों के मन में चेतना के बीज बोता है। सरकारी योजनाओं को अमलीजामा पहनाते हुए इस विद्यालय ने “जल-जीवन-हरियाली” अभियान को महज कागजों पर नहीं, बल्कि हर दीवार और हर कोने में जीवंत कर दिया है। विद्यालय परिसर में कदम रखते ही चारों ओर हरियाली, जल संरक्षण और जीवन मूल्यों से जुड़े संदेशों की रंगीन पेंटिंग्स मन को मोह लेती हैं। “जल है तो जीवन है”, “पेड़ लगाओ, धरती बचाओ”, “हरियाली ही खुशहाली है” जैसे प्रेरक नारों से वातावरण गूंज रहा है। इस परिवर्तन के सूत्रधार हैं विद्यालय के प्रधानाध्यापक लक्ष्मेश्वर प्रसाद महतो, जिनकी नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शिता ने विद्यालय को नया स्वरूप दिया है। प्रधानाध्यापक महतो के प्रयास से विशेष पेंटरों को बुलवाकर दीवारों पर सुंदर और प्रेरक चित्रकारी करवाई गई है। इस कार्य में विद्यालय के शिक्षकों सुमन कुमार साफी, मनोज कुमार, कामिनी कुमारी, सत्य प्रकाश, अजीत कुमार, गोविंद आनंद पाठक, राकेश कुमार, सोनम कुमारी, मुकेश यादव, बबली कुमारी, श्रवन कुमार, संतोष कुमार, विनोद कुमार यादव, विनय कुमार शर्मा, खुशबू कुमारी, हरि किशोर झा, अशोक कुमार महतो, सत्यनारायण मंडल सहित अन्य शिक्षक व शिक्षिकाएं ने भी पूरा सहयोग और प्रेरणा दी है।
- विद्यालय की दीवारें नहीं, मानो सीखने की खुली किताब है *
विद्यालय के अंदर की दीवारों को भी शिक्षण सामग्री से जीवंत कर दिया गया है। हिंदी व अंग्रेजी वर्णमाला, गणितीय सूत्र, भूगोल के नक्शे और नैतिक शिक्षा से जुड़े चित्र हर कक्षा को खुद एक पाठ पुस्तक में बदल रहे हैं। यहां के बच्चे न केवल किताबों के पाठ पढ़ रहे हैं, बल्कि दीवारों से भी ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।विद्यालय की इस अनूठी पहल की चर्चा अब गांव-गांव तक फैल रही है। अभिभावकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने विद्यालय की इस पहल की प्रशंसा करते हुए इसे अन्य सरकारी स्कूलों के लिए अनुकरणीय बताया है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों में सकारात्मक सोच, स्वच्छता के प्रति जागरूकता और पढ़ाई के प्रति नई रुचि देखने को मिल रही है।
इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाध्यापक लक्ष्मेश्वर प्रसाद महतो ने कहा “हमारे बच्चों को सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और जीवन में भी शिक्षा खोजने की आदत डालनी चाहिए। विद्यालय को ऐसा वातावरण देना हमारा प्रयास है।




