निभाष मोदी, भागलपुर

अल्पसंख्यक छात्रावास में चल रहा विवाद और भी तूल पकड़ता जा रहा है ,बताते चलें कि आज वहां की छात्राएं काफी मायूस दिखी, छात्राएं विभाग के खिलाफ और सरकार के खिलाफ काफी खरी-खोटी बोलती नजर आई छात्राओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम लोगों के साथ इतनी परेशानियां हैं कि यहां की सारी परेशानियां गिनाना मुश्किल है, उनका कहना हुआ कि सबसे बड़ी परेशानी है कि सरकार की ओर से बहुत सारी फैसिलिटी दी जाती है परंतु उस फैसिलिटी का एक प्रतिशत भी हमें नहीं मिल पाता, उनका कहना हुआ इस फैसिलिटी में लाइब्रेरी भी है लेकिन लाइब्रेरी आज तक नहीं खुला, लाइब्रेरी में सब दिन ताला बंद रहता है, यहां थ्री सीटर रूम भी है सिंगल सीटर रूम भी है जहां थ्री सीटर रूम में लड़कियां रहती हैं वहां पढ़ाई करने में परेशानी होती है ,लाइब्रेरी में जाकर वह शांति से पढ़ाई कर सकती हैं परंतु लाइब्रेरी बंद रहता है ,उसमें ताला लगा रहता है !सरकार की ओर से छात्रावास में रूम की व्यवस्था है लड़कियां शाम में जाना चाहती हैं तो कॉमन रूम बंद रहता है ,उसमें सारी फैसिलिटी है मनोरंजन के साधन है परंतु लड़कियां वहां नहीं जा सकती उसमें भी ताला लगा रहता है, साथ ही अल्पसंख्यक छात्रावास की लड़कियों का कहना हुआ कि हमलोगों को दोपहर 2 बजे के बाद ही खाना मिलता है कभी-कभी 3:00 भी बज जाता है! सुबह से 2:00 बजे से 3:00 बजे तक हम लोग कैसे रहेंगे यह बहुत बड़ी परेशानी का विषय है, हमलोगों के लिए इसके लिए छात्रावास में सरकार के द्वारा सारी व्यवस्था की गई है लेकिन फिर भी हम लोगों को कोई व्यवस्था नहीं मिल पाता है ,जनरेटर हो, इंडक्शन हो ,फ्रीज हो ,जनरेटर हो इसकी कोई भी सुविधा हम लोगों को नहीं मिल पाती है, उनका कहना है सारी सुविधाएं वहां जो मेम लोग रहती हैं उनके कब्जे में है हम लोगों को कुछ भी सुविधा नहीं मिल पाती है , यहां कि जितनी भी परेशानी है इन मुद्दों पर इसका सॉल्यूशन जल्द से जल्द होना चाहिए, कॉमन रूम में हमलोग के लिए मनोरंजन के साधन है उसे हम लोग यूज़ कर सके, खाना समय पर मिले , उन लोगों का यह भी कहना हुआ कि छोटे-मोटे पर्व त्यौहार में भी जो भी मैम रहती हैं उनका कहना होता है आप लोग सभी अपने घर को चले जाएं हॉस्टल खाली कर दें और जो नहीं जा पाते हैं उनके लिए कोई उपाय नहीं है, मैम बाहर से ही ताला बंद कर चली जाती हैं, अल्पसंख्यक छात्रावास में लड़कियों से जब पूछा गया कि आपके ड्रेस पर भी कुछ विवाद हो रहा है उस पर क्या कहना चाहेंगे,आपने जो यह बुरका पहन के रखा है उस पर भी विवाद होता है तो उनका साफ कहना हुआ कि नहीं, हमारे ड्रेस पर कोई विवाद नहीं है !यह जितनी सारी परेशानियां हैं यह परेशानियों को लेकर हम लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, वहा रह रही छात्राओं का यह भी कहना हुआ कई दफे हम लोग जब बंद रहते हैं बाहर से ताला बंद रहता है और हम लोग अंदर रहते हैं तो खंडहर की ओर जाकर वहां से लकड़ी लाकर चूल्हा बनाकर हम लोग कई दफे खाना खाए हैं , सारी लड़कियों का यही कहना हुआ की यह सुपरिटेंडेंट हमें नहीं चाहिए इसे बदला जाए यह जब चेंज हो जाएगी दूसरी सुपरिटेंडेंट आएंगे तो शायद सारा सॉल्यूशन खुद ब खुद सॉल्व हो जाएगा!
वहीं दूसरी ओर सफाई देती हुई मुस्लिम मैंनेरिटी कॉलेज की उर्दू की प्रोफ़ेसर ने कहा कि मैं इससे पहले कई जगह काम की कभी शिकायत का मौका नहीं दिया चाहे वह साक्षरता मिशन का काम हो चाहे वह कई और भी कार्य मैंने जो की है उस पर कभी दाग नहीं आया है, कभी लांछन नहीं आया है ,परंतु यहां की लड़कियां इस तरह क्यों कर रही हैं मुझे पता नहीं उनका कहना हुआ यहां की लड़कियां 2018 में भी जो सुपरिटेंडेंट थी उनके लिए भी यह लोग हल्ला बोल प्रदर्शन किया और उन्हें भी हटाने की बात कही थी मैं 26 अगस्त 2018 से अभी तक हूं लगभग 3 साल के कार्यकाल में अभी तक इन्होंने हो हल्ला नहीं किया अभी अचानक हो हल्ला क्यों कर रही हैं यह मुझे पता नहीं! अल्पसंख्यक हॉस्टल की सुपरिटेंडेंट ने कहा मैं सबको अपने बेटी के तरह मानती हूं, मैं जब भी बात करती हूं बेटी कहकर ही संबोधित करती हूं !मैं यह कभी नहीं चाहूंगी कि जो भी हॉस्टल में लड़कियां रह रही हैं वह परेशानी में रहे परंतु इतनी परेशानियों को उन लोगों ने गिना दिया मुझे सुनकर आश्चर्य लग रहा है ऐसी कोई बात नहीं है यहां सब कुछ ठीक है।




