:- रागिनी शर्मा!

गंगा के ऐतिहासिक जलस्तर को प्राप्त करने के बाद अब जाकर गिरावट आनी शुरू हुई है। इस वर्ष
175 से.मी. तक पहुँच गई थी गंगा जो अबतक के जलस्तर का अधिकतम रिकॉर्ड है।
इस बार गंगा ने पिछले सभी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया।
फलस्वरुप भारी तबाही देखने को मिली। जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया। नेशनल हाइवे पर पानी आने के बाद आवागमन तक प्रभावित है।
16 सेंटीमीटर की मामूली गिरावट से भी हालात सामान्य होने के आसार नही हैं।
अगर गिरावट जारी रही और अभी कम से कम 100 सेमी और गिरावट आएगी तब लोगों को राहत मिलनी शुरू होगी।
शर्त ये है कि ये गिरावट जारी रहे और उत्तराखंड यूपी आदि में बारिश नही हो इसके साथ ही गंगा में मिलने वाली नदियों का जलस्तर भी नियंत्रित रहे। तब जाकर राहत महसूस होगी और सबकुछ सामान्य रहा तब भी अभी 15 दिन और लोगों को नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ेगा।
इस बीच एन डी आर एफ़ ने मोकामा में मोर्चा सम्हाल लिया है।
हालाँकि प्रशासनिक मदद अब भी नदारद ही है। बाढ़ पीड़ितों को देखने सुनने वाला यहां कोई नही है। अधिकारी मुख्यमंत्री के आदेशों की भी अवहेलना करने में कोताही नही कर रहे हैं।
16 सेमी की गिरावट के बाद अभी गंगा 175 से.मी से हटकर 159 सेंटीमीटर पर आई है जो खतरे के निशान से 17 से.मी. अधिक है।
खतरे का निशान यहाँ 141.76 सेंटीमीटर है।
हाथीदह स्थित केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार अभी और जलस्तर घटने की संभावना है।




