सरकार को मुंह चिढ़ाता उत्तरा से पोखरौनी जाने वाली सड़क ,लोगों ने किया प्रदर्शन, विधायक के खिलाफ आक्रोश!

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रिपोर्टर — राजीव कुमार झा

कहा विधायक देते रहे हैं झूठा आश्वासन

क्षतिग्रस्त पुला की वजह से कई बार हो चुका है दुर्घटना

एक समय था जब पुरे बिहार में सरको की जाल बिछाने का दाबा किया जा रहा था।जिस हां बहुत सी जगहों पर ग्रामीणों सरके बनी भी और आज लगभग इन सभी सरको का हाल बेहाल है। लेकिन इन सरको से जुदा एक सरक है, जो उस दौर में भी स्थानीय जन प्रतिनिधियों से लेकर पदाधिकारियों के उपेक्षा के कारण बनाई नहीं जा सकी। ये सरक मधवापुर प्रखंड के उत्तरा से पखरौनी जाने वाली बदहाल सड़क है। उक्त सरक को लेकर लोगों ने स्थानीय विधायक से लेकर सांसद तक का वर्षों से गणेश परिक्रमा कर कर के थक चुके हैं। तो लोगो को स्थानीय जन प्रतिनिधि से लेकर पदाधिकारियों के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ा है। सड़क जर्जर होने को लेकर स्थानीय लोगों ने सांसद , विधायक सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद का नारा लगाते हुए विरोध प्रदर्शन कर अपने गुस्सा का इजहार किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्तरा से बोकहा होते हुए पोखरौंनी जाने वाली सड़क जर्जर हो चुका है। वही बोकहा से पाखरौनी जाने वाली मार्ग में पुल क्षतिग्रस्त हो चुका है। पुल क्षतिग्रस्त होने की वजह से ब्रा बर यहां दुर्घटना होती रहती है। दुर्घटना के कारण एक व्यक्ति की जान भी जा चुकी है। पुल जर्जर होने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। लोगों ने बताया है कि ये सड़क कहने मात्र के लिए सड़क है। जिसके होने या ना होने का कोई मतलब ही नहीं। सड़क में उतार चढ़ाव और बरे बरे गढ़े होने के कारण आये दिन दुर्घटनाएं होती हैं। लोग के आने जाने के लिए यही एक मात्र सरक है। जिस पर जान जोखिम में डालकर लोग सफर करने के लिए मजबूर हैं। ही बाबत पूर्व प्रमुख दिनेश ठाकुर ने बताया है कि स्थानीय विधायक के द्वारा सिर्फ झूठा आश्वासन दिया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन में शामिल स्थानीय लोगों में उपेंद्र राम, विश्वनाथ कापर, रामसरोबर राय, मंनशी पासवान, असेश्वर कापर, श्याम दास,भजन साह, सोनफी कापर, गुलाब कापर, राजकुमार कामत, रामलोचन कापर, छोटे यादव, धर्मवीर साह, संजीव साह, तिलेश्वर पासवान, विनोद पासवा, नन्द किशोर यादव, सहित दर्जनों लोगों का कहना है, यदि सड़क निर्माण नहीं कराया गया तो हम लोग जोरदार आंदोलन आगे करेंगे। यहां ये बताना लाजिमी समझते हैं कि एक जमाना था जब यही सत्ता में बैठे लोग विपक्ष में जब हुआ करते थे तो ये लोग तत्कालीन सरकार की खिंचाई ये कहकर किया करते थे कि सरक में गढ़ा है या गढ़े में सरक। लेकिन आज प्रदेश में डबल इंजन की सरकार के लिए ये मूंह चिढ़ा रही सरक मात्र ही नहीं जिले भर की सैकड़ों सरको की खास्ता हालत को देखने एवं इसे सुधारने के दिशा में अमल करने की जरूरत है।

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