पंकज कुमार जहानाबाद ।
जहानाबाद के इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक मुसलमानों का नया साल मुहर्रम के महीने से शुरू होता है. वैसे तो ये महीना दुनिया के हर एक मुसलमान के लिए खास है, लेकिन शिया समुदाय के लिए ये महीना काफी अहमियत रखता है. मुहर्रम का जिक्र आते ही लोगों के दिमाग में सबसे पहले कर्बला का ख्याल आता है.तारीख के मुताबिक 1400 साल पहले कर्बला की जंग हुई थी. ये जंग जुल्म के खिलाफ और इंसाफ के लिए हुई थी. इस जंग में हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीद हो गए थे।
इसी सिलसिले में जहानाबाद जिले के अली नगर पाली में शिया समुदाय के द्वारा मोहर्रम का चांद देखने के बाद इमामबाड़े में मजलिस- मातम का आयोजन शुरू हो गया है। मुल्क और मुल्क से बाहर देश में रहने वाले लोग भी अपने गांव पहुंच कर ईमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथ शहीद हुए परिवार और साथी को याद कर मातम का आयोजन करते है।
इस मौके पर सैयद सलमान हुसैन ने बताया के अली नगर पाली में एक मोहर्रम से दस मोहर्रम तक मजलिस मातम और जुलूस का आयोजन होता है।




