रिपोर्ट- अमित कुमार
रावण के राज में संतों का बहुत अपमान होता था। अपमान से आहत संतों ने लंका का त्याग कर दिया था। आज भारत में भी संत अपमानित हो रहे हैं। सनातन के सर्वोच्च शिखर संत शंकराचार्य होते हैं, शंकराचार्य ही सनातन की व्याख्या करते हैं और उन शंकराचार्यों को मोदी सरकार अपमानित कर रही है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सनातन का ऐसा अपमान इससे पहले भारत में कभी नहीं हुआ था। हां, रावण की लंका में जरूर हुआ था। तुलसीदास जी ने लिखा है ईहां कहां संतान के बासा, लंका निसिचर करे निवासा। उस लंका का क्या हश्र हुआ हम सब जानते हैं। इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी से मेरा आग्रह है सनातन के सर्वोच्च शिखर संतों का अपमान मत कीजिए। राजसत्ता का यह अहंकार कि वह हमारे धर्म सत्ता को अपमानित करे ठीक नहीं है।
असित नाथ तिवारी
प्रवक्ता, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी




