रिपोर्ट धर्मेंद्र कुमार मोतिहारी
15 साल पहले अलग हुए पति पत्नी ,,आज एक बार फिर हुआ मिलान
घरेलू कलह व प्रताड़ना से आजिज पत्नी ने छोड़ा था पति का घर और अपने एक साल के बच्चे के साथ चली गयी थी बेतिया और वही रहकर करती थी गुजारा
पत्नी की याद में अधिकारी पति बना साधु ,,एयरफोर्स की नौकरी छोड़ रहता था साधु बनकर
समाज व परिवार के लोगो को समझाने बुझाने व बेटे के द्वारा पापा को याद करने के बाद पत्नी ने बदला अपना फैसला और आ गयी पति के पास
अब दोनों ने अपने एप्ने गीले शिकवे दूर कर साथ रहने को है तैयार
_मोतिहारी में एक पति पत्नी के अनूठी प्रेम कहानी का आज एक अनोखा रूप देखने को मिला है ।कहानी कुछ फिल्मी है लेकिन हकीकत से रु ब रु करवाती है ।जहां आज से करीब पंद्रह साल पहले मामूली कहासुनी व पारिवारिक कलह से आजिज पत्नी ने अपने पति व उसका घर छोड़ दिया और बेतिया जाकर एक स्कूल में पढ़ाने लगी ।बेचारा पति भी अपनी पत्नी की बेवफाई से आजिज होकर एयरफोर्स की अपनी अच्ची खासी नौकरी छोड़कर साधु बयँ जाता है और दर दर भटककर भगवान की सेवा करने लगता है और दोनों की राह बिल्कुल अलग हो जाती है,,लेकिन कहते है न कि जोड़ी ऊपर वाला ही बनाता है और तोड़ता भी ऊपर वाला ही है । पंद्रह साल तक एक दूसरे से अलग रहने के बावजूद दोनों के मन मे एक दूसरे के प्रति प्यार किसी कोने में छुपा रहता है और जब समय बीतता है और उनदोनो का बच्चा बड़ा हो जाता है और अपने पिता के बारे में बार बार पूछता है तो माँ का कलेजा पिघलता है और दोनों भागे भागे एक दूसरे के समीप आते है और दोनों सभी गीले शिकवे भुलाकर एक दूसरे के साथ रहने को हो जाते है तैयार ,,, ये कहानी सुइकर आपको लगता होगा कि ये किसी फिल्म की पटकथा है लेकिन आप ये गलत सोच रहे है ,,क्योकि ये कहानी फिल्मी नही बल्कि हकीकत है और ये कहानी मोतिहारी की है ।जी हां आज से सोलह सत्रह साल पहले मोतिहारी के गोविंदगंज थाना क्षेत्र के जितवारपुर के रहने वाले प्रभाकर कुमार पांडेय की शादी पिपरकोठी थाना क्षेत्र के बंगरी गाँव की रहने वाली संदीप देवी के साथ बड़े ही धूमधाम के साथ हुआ था और दोनों करीब दो साल तक एक दूसरे के साथ राजी खुशी रहे ।उस समय प्रभाकर पांडेय एयरफोर्स का एक अधिकारी था और जैसे जैसे समय बीतता गया दोनों के बीच मामूली बात को लेकर पारिवारिक कलह बढ़ता गया। लड़की उसके परिजनों के ताने बाने से परेशान हो गयी और अपने दो साल के मासूम बच्चे को लेकर अपने मायके चली गयी और उसके बाद वो अपना व अपने बच्चे का पालन पोषण करने के लिए बेतिया के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगी ।इसी बीच उसका पति भी इस सदमे व समाज के ताना बाना को सह नही पाया और उसने भी अपनी नौकरी छोड़ दी और बयँ गया साधु ।साधु के वेश में वो करीब पंद्रह वर्षो से रहकर मुकलिसी की जिंदगी ब्यतीत कर रहा था । इसी बीच दोनों परिवारों के बीच केस मुकदमा भी हुआ जो आज तक चल रहा है पारिवारिक कोर्ट से लेकर प्रताड़ना व मानसिक प्रताड़ना ,दहेज सभी तरह का केस दोनों पक्ष लड़ रहे थे इसी बीच लड़की व लड़का पक्ष के लोगो ने दोनों के बीच सुलह करवाने की ठानी और उनका ये प्रयास आज उस समय सफल हो गया जब आज शहर के नर्सिंग बाबा मंदिर में दोनों की मुलाकात हुई ,,थोड़ी बहुत बात हुई और मासूम बच्चे की खातिर पत्नी की बेवफाई से साधु बने पिता ने दोनों को अपनाने की सहमति दी उसके बाद पत्नी का प्यार भी जाग गया और आज ये निर्णय हुआ कि अब दोनों प्राणी पिछले इतिहास को भुलाकर एक दूसरे के साथ रहेंगे और हंसी खुशी दोनों जीवन जिएंगे,,,साथ ही दोनों ने एक दूसरे पर किये गए मुकदमे को वापस लेने की भी बात कही है ।





