बलियावी के बयान से जदयू ने किया किनारा, नीतीश बोले-मिलकर पूछेंगे

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रिपोर्ट अनमोल कुमार

सीएम ने कहा-लोग जो चाहते हैं बोलते रहते हैं
जदयू ने कहा-सेना पर कोई सवाल नहीं उठा सकता
कहा-पार्टी उनके बयान का समर्थन नहीं करती

पटना : अपनी ही पार्टी में गुलाम रसूल बलियावी के फौज वाले बयान को लेकर जदयू में काफी नाराजगी है। हालांकि बलियावी अपने बयान पर कायम हैं, लेकिन पार्टी ने उनका साथ छोड़ दिया है। जदयू के दो प्रवक्ताओं ने साफ कह दिया है कि पार्टी उनके बयान का समर्थन नहीं करती है। इधर मुजफ्फरपुर में सीएम नीतीश कुमार ने भी कहा है कि लोग जो चाहते हैं बोलते रहते हैं। हम उनसे मिलेंगे और पूछेंगे। जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि सेना पर हमें गर्व है, धर्म के आधार पर सैन्य पुरुषार्थ पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। एक अन्य प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा है कि बलियावी ने किस कैपेसिटी में ऐसे बयान दिए हैं यह समझ से परे है। पार्टी ऐसे बयानों से इत्तेफाक नहीं रखती है। इससे पहले बलियावी रविवार को कहा था कि प्रधानमंत्री को अगर पाकिस्तान से डर लगता है तो वो 30 प्रतिशत मुसलमानों को फौज में भर्ती करें। विवाद बढ़ने पर उन्होंने कहा कि मेरा सीधा सवाल सरकार से है। माने-मतलब जिसको जो निकालना है निकालें। गुलाम रसूल बलियावी ने अब कहा है कि लोगों को मेरे हर अच्छे काम पर कुछ ना कुछ ऐब निकालने की आदत है और बलियावी ने अपने सेना के जज्बे का, सेना के सम्मान का, कहीं से कोई अपमान नहीं किया। मैंने तो प्रधानमंत्री से और सत्ता में बने लोगों से सवाल किया है। उनसे सवाल किया है, जो आज की डेट में अदानी जी का नाम भी लेने से डर रहे हैं। मेरा सवाल उनसे है जो आज की डेट में चीन का नाम लेने से भय खाते है, मेरा सवाल उनसे है। उन्होंने कहा कि अब उनके लोग अपने हर जुर्म पर पर्दा डालने के लिए सेना का सहारा लेते हैं। यह भगोड़े लोग हैं। जो सेना की वर्दी में अपना चेहरा छुपाना चाहते हैं। सेना का अपमान तो उन्होंने किया है। सेना के जवानों के वर्दी का फोटो लगाकर शहादत और बलिदान के नाम से वोट लिया। जिस पर सेना के वीर जवानों ने आपत्ति जताई थी। मेरा सवाल सीधा से सरकार से है। माने-मतलब जिसको जो निकालना है निकालें। बलियावी के बयान पर जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस मामले पर आधिकारिक बयान दिया है। कहा है कि इतिहास गवाह है देश के सैन्य पुरुषार्थ पर धर्म और जाति के आधार पर विभाजनकारी रेखा कतई मंजूर नहीं है। अग्निवीर के मसले पर सार्वजनिक अंतर्विरोध था। सभी सैनिकों को पेंशन का लाभ और अन्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। उसमें कटौती के हम खिलाफ हैं। लेकिन धर्म के आधार पर कोई सैन्य पुरुषार्थ पर सवाल उठाए, न देश का संविधान इसकी इजाजत देता है और ना ही जनता दल यू। सच यह है कि अपने सैन्य बल पर हमें गर्व है और ऐसे सवाल पर न मतभेद रहता है और मनभेद रहता है।

अभिषेक ने कहा-ऐसे बयानों से इत्तेफाक नहीं
इधर, जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा है कि सेना के शौर्य और पराक्रम पर सवाल उठाने का अधिकार किसी को भी नहीं है। ऐसे मुद्दे राजनीति के लिए नहीं होते हैं। सेना के मनोबल को कभी गिराया नहीं जा सकता है। कई मौकों पर सेना ने यह साबित किया है कि वे लोग किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए कितने सक्षम हैं। हजारों सेना के जवानों ने अपनी शहादत दी है तब जाकर देश की सीमाएं सुरक्षित रहती है। गुलाम रसूल बलियावी ने किस कैपेसिटी में ऐसे बयान दिए हैं, यह समझ से परे है। पार्टी ऐसे बयानों से इत्तेफाक नहीं रखती है। जिम्मेदार पद पर बैठे किसी भी व्यक्ति को ऐसे बयानों से बचना चाहिए। यह उनकी सोच को दर्शाता है। हमारी पार्टी सेना का सम्मान करती है।

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