अरविंद कुमार की रिपोर्ट!
मोतिहारी के केसरिया ईदगाह में हर्षवउल्लास के साथ अदा की गई ईद उल अज़हा की नमाज,देश की तरक्की सलामती की मांगी गई दुआ
ईद उल अज़्हा (बक़रईद) की नमाज केसरिया ईदगाह में निहायत हर्षोउल्लास के साथ अदा की गई । लोगों ने गले मिल कर एक दूसरे को मुबारकबाद दी, और देश की खुशहाली अमन व सलामती, तरक्की व ख़ुश्हाली की दुआ मांगी गई। इस अवसर पर मौलाना अनीसुर रहमान चिश्ती ने कहा कि क़ुर्बानी हजरते इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। आप ने परवरदिगारे आलम के आदेशानुसार अपने इकलौते पुत्र हज़रते ईस्माइल को खुदा की राह में कुर्बान करने के लिए तैयार हुए। लेकिन फरिश्तों ने जन्नत से एक दुम्बा हाजि़र किया और उसकी कुर्बानी हुई। उसके बाद से ही कुर्बानी का तरीका शुरू हुआ।आप के लिए यह एक सख्त परीक्षा और म्श्किल घड़ी थी। क्योंकि एकलौता औलाद की कुर्बानी करने का आदेश मिला जो निहायत कठिन काम था। मां-बाप की खिदमत फर्माबरदारी करने का हुनर हजरत ए स्माइल से हमें सीखने की जरूरत है।
इंसान को अपने अंदर से क्रोध ,घमंड़ ,अत्याचार को खत्म करना सबसे बड़ी कुर्बानी है। इंसान नेक बने और इंसानियत की राह पर चले यह कुर्बानी का पैग़ाम है। इस अवसर पर कौमी एकता फ्रंट के अध्यक्ष सह जदयू नेता वसील अहमद खान ने कहा कि कौमी एकता,अखंडता आपसी भाईचारा के सौहार्दपूर्ण माहौल में ईद उल अजहा की नमाज अदा की गई और यह हमारे देश की संस्कृति रही है कि हम मिलजुल कर अपने त्योहारों को अपने धार्मिक उसूलों के अनुसीर अदा करते हैं और एक दूसरे को मुबारकबाद देते हैं।हजरत इस्माइल जब छोटे थे तो सफा और मर्वा पहाड़ी जो अरब देश में स्थित है उसके समीप एड़ियों की रगड़ने की वजह से एक पानी का चश्मा जारी हुआ जिसको जमजम कहते हैं। जो आज भी दुनिया के सभी पानी में महत्वपूर्ण है और जो जिस नियत से उसको पीता है उसकी दुआ कबूल होती है।
इस अवसर पर मौलाना नेमतुल्लाह,कारी उबैद रजा, अब्दुल गनी, हाफिज़ मोहम्मद आलम,अहमद रजा,मोहम्मद इम्तियाज, खुर्शीद आलम, पत्रकार असरफ आलम,फैज बाबू,मोहम्मद सलीम, हाजी मोहम्मद हबीब, रहीमुद्दीन समेत हजारों लोगों ने ईद उल अजहा की नमाज अदा की।




