कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर!:-
कहते हैं राजनीति में कोई किसी का दोस्त या दुश्मन नहीं होता। एक समीकरण तय कर दोस्ती और दुश्मनी का अंदाजा लगाया जाता है। और उसी हिसाब से समीकरण की रणनीति तय की जाती है। एनडीए की तरफ से घोषणा की गई राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू के नामांकन का दौर चल रहा था। दरअसल केंद्रीय टीम के सूत्र बताते हैं कि नामांकन के पूर्व रात्रि में प्रधानमंत्री ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को फोन किया और उन्होंने कहा कि प्रस्तावक आप ही लोगों को बनना है। जिसके बाद सूबे के मुखिया नीतीश कुमार ने जदयू की अध्यक्षता के लिए लल्लन सिंह को भेज दिया। और जदयू के अध्यक्ष लल्लन सिंह जब वहां उस भीड़ में प्रधानमंत्री को इधर उधर कहीं नजर नहीं आए। जिसके बाद लल्लन सिंह शांतिप्रिय मुद्रा में योगी आदित्यनाथ के साथ खड़े थे। जिसके बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें आवाज लगाया लल्लन जी आप आगे आइए। अब इसके कई राजनीतिक मायने भी लगाए जाने लगे हैं। दरअसल राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि प्रधानमंत्री एनडीए गठबंधन के धर्म का पालन कर रहे थे। तो दूसरी ओर विश्लेषक यह भी बताते हैं कि जदयू के अध्यक्ष का अब केंद्र में मंत्री बनना लगभग तय है। ऐसे में कई प्रखंड के नेता जी फिलहाल सरकार के जोड़-तोड़ और गुणा भाग में लग गए हैं। वाकिया दिल्ली की जरूर है लेकिन इसकी गूंज हर गांव में पहुंच रही है। छूट गई है नेता की तो बात ही जुदा है।




