बड़ी मुश्किल डगर पनघट की, क्या तीर निशाने पर बैठेगा?

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कार्यकारी संपादक पंकज कुमार ठाकुर!

स्थानीय प्राधिकार बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते-आते मुकाबला रोचक होते जा रहा है। महागठबंधन से जहां संजय कुमार ने अपनी दावेदारी पेश की तो। जदयू से पहले ही विजय कुमार सिंह ने अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं। अब ऐसे में इस सीट पर फिलहाल आकड़ा मुकाबले का आकलन किया जा रहा था। तथा कहना भी लाजमी होगी टक्कर वाजिब में कशमकश था। लेकिन मंगलवार को जद यू बेलहर विधायक के पत्नी सिंपल यादव ने निर्दलीय नामांकन देकर जदयू के आगे एक लंबी लकीर खींच गई। अब ऐसे में अपने घर के उन्हें सब दांव पेच मालूम है। जैसा कि हमारे विश्लेषक ने पहले भी इस सीट पर आकलन करते हुए बताया था कि अगर जदयू के साथ कोई अनहोनी ना हो तो सीट की दावेदारी जरूर बन रही है। लेकिन अब ऐसे में उनसे निपटना कोई टेढ़ी खीर से कम साबित नहीं होगी क्योंकि अगर आप आकलन करें तो उन्हें पार्टी के साम दाम दंड भेद तक मालूम हो चुके हैं। दरअसल यह यूं ही नहीं कहा जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि वर्तमान विधायक एक बार इस सीट पर काबिज रह चुके हैं। और उन्हें इस मैदान की बल्लेबाजी भी भलीभांति मालूम है। हालांकि इस बार सपाट पिच पर बल्लेबाजी करना किसी भी प्रतिनिधि के लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि इस बार यहां मैदान में उम्मीदवारों को बाउंसर का भी सामना करना पड़ रहा है। खैर चुनाव तो अनिश्चितता का खेल है। लेकिन सिंपल देवी भी एक बार जिला परिषद अध्यक्षा रह चुकी हैं। और अभी वर्तमान में जिला परिषद सदस्य भी हैं। ऐसे में आप अगर आकलन करेंगे तो कहीं ना कहीं सिंपल देवी की भी पकड़ जनप्रतिनिधि पर आप हल्के में नहीं ले सकते हैं। हालांकि उन्होंने दावा भी ठोंक दिया उनके इर्द-गिर्द कोई नहीं है। खैर फिलवक्त कुछ कहना जल्दबाजी होगी। इधर राजनीति विश्लेषक बताते हैं कि कमोबेश अब यह चुनाव त्रिकोणीय संघर्ष की ओर मुड़ चला। परिणाम चौंकाने वाले आए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं कही जाएगी। फिलवक्त अभी सभी जीत रहे हैं।

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