सचिन केजरीवाल की रिपोर्ट
बिहार सरकार के वित्त विभाग ने निकाला विज्ञापन
जमाकर्ताओं के हित का संरक्षण अधिनियम 2002 तथा संशोधित अधिनियम (2013 एवं 2017) के प्रावधानों तथा अन्य सुसंगत कानून के तहत होगी आवश्यक करवाई
साहिबगंज
सहारा प्रकरण में एक नई अपडेट मिली है जिसके अनुसार बिहार सरकार के सांस्थिक वित्त निदेशालय, वित्त विभाग ने सहारा से परेशान हुए निवेशकों के लिए इसी महीने की 2 फरवरी को एक विज्ञापन पीआर संख्या 012599 जारी करते हुए उनका भुगतान करवाने की तरफ एक कदम बढ़ाया है। इस विज्ञापन के अनुसार सहारा से भुगतान को ले कर परेशान निवेशक अपने भुगतान के लिए शिकायत दर्ज करवाने और शिकायत के आधार पर समूह पर करवाई करने की बात कही गई है, साथ ही ये भी बताया गया है की सहारा में निवेशकों द्वारा जमा की गई धन राशि की परिपक्वता के बाद निवेशकों पर उस राशि को पुननिवेश के लिए दबाव बनाया जाता है, जिसके विरुद्ध निवेशक अपनी शिकायत सांस्थिक वित्त निदेशालय, वित्त विभाग पटना अथवा अपर पुलिस महानिदेशक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार पटना अथवा बिहार क्षेत्राधिकार से संबंधित जिलों के जिला पदाधिकारी, जो इसके लिए सक्षम प्राधिकार हैं, को भेज सकते हैं। दरअसल इस पूरे विज्ञापन में जो कहा गया है वो कुछ इस प्रकार है। सहारा समूह के विरुद्ध आम शिकायत है की जमाकर्ताओं द्वारा पुन निवेश का विकल्प स्वीकार नहीं करने पर उन्हे परिपक्व राशि का भुगतान नही किया जाता है अथवा आंशिक भुगतान कर शेष राशि को पुन निवेश के लिए बाध्य किया जाता है। सहारा इंडिया के निवेशकों को इस विज्ञापन के माध्यम से सूचित किया जाता है की यदि सहारा इंडिया द्वारा परिपक्व राशि का भुगतान ससमय नही किया जा रहा है तो इस संबंध में अपनी शिकायत सांस्थिक वित्त निदेशालय, वित्त विभाग पटना अथवा अपर पुलिस महानिदेशक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार पटना अथवा बिहार क्षेत्राधिकार से संबंधित जिलों के जिला पदाधिकारी, जो इसके लिए सक्षम प्राधिकार हैं, को भेज सकते हैं। सहारा समूह सहित किसी भी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी द्वारा यदि निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की जाती है तो संबंधित कंपनी के विरुद्ध बिहार जमाकर्ताओं के हित का संरक्षण अधिनियम 2002 तथा संशोधित अधिनियम (2013 एवं 2017) के प्रावधानों तथा अन्य सुसंगत कानून के तहत आवश्यक करवाई सरकार/सक्षम पदाधिकारी के स्तर से की जाएगी। अब आप खुद समझ सकते हैं की इस विज्ञापन में वित्त विभाग द्वारा कहीं भी किसी भी कारण से भुगतान के रुकने का कोई कारण नहीं बताया है, इससे स्पष्ट होता है की सहारा द्वारा दिया जा रहा बार बार सेबी का हवाला पूरे तरह से झूठा है, हां सहारा सेबी का विवाद अवश्य चल रहा है मगर इस विवाद से वर्तमान में अपना भुगतान मांग रहे निवेशकों का कोई लेना देना नही है। और ये हाल किसी एक राज्य या एक जिले का नही है, यही हालात झारखंड में भी है और साहिबगंज जिले में भी है जहां पिछले कुछ सालों से निवेशकों का भुगतान नहीं किया जा रहा है जिसकी वजह से निवेशकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। और निवेशकों के सब्र का बांध अब टूट रहा है और इसी बात को ले कर विकास चौधरी की अध्यक्षता में सहारा निवेशक संघर्ष समिति का निर्माण किया गया है।




