धूमधाम से मनाया जा रहा है भाई बहन के प्रेम एवं आदिवासी संस्कृति का समागम पर्व सोहराय!

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ब्यूरो रिपोर्ट शंखनाद

जामा(दुमका)

प्रखण्ड अंतर्गत सुगनिबाद, भोदाबादर मोहुलबना ,बेलकुपी तपसी, फुलझरी समेत अन्य सभी आदिवासी गांवों में पांच दिनों तक चलने वाला सोहराय पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है । गुरुवार को बेलकुपी भोडाबादर, सुगनिबाद में सोहराय के चौथे दिन परंपरागत रीति रिवाज एवं तिथि के अनुसार जाली उत्सव मनाया गया|अवसर पर सभी बड़े बुजुर्गों, युवाओं एवं युवतियों ने सामुहिक रूप से नृत्य में भाग लिया। जाली उत्सव पर पूजा के उपरांत मांग कर खाने खिलाने की परंपरा है। यहां बताते चलें कि सोहराय पर्व का पहला दिन नहान यानी नहाने खाने एवं साफ सफाई के रूप में मनाया जाता है। और घर के सदस्य गाय बैल को नहला धुला कर मैदान में ले जाकर उनकी विशेष पूजा करते है जिसे गोढ़ टंडी कहा जाता है। जहाँ पूजा स्थल में अंडा रखकर गाय बैलों के पैरों से कुचला जाता है सबसे पहले जिस गाय या बैल द्वारा कुचला जाता है उसे पकड़ कर माथा और सींगों में सिन्दूर दिया जाता है |जिस घर का गाय या बैल है उनके घर वालों के लिए शुभ साल माना जाता है। दूसरे दिन पूजा के उपरांत इष्ट देव देवी देवताओं एवं पूर्वजों की पूजा की जाती है। तीसरे दिन बरद खूंटाव उत्सव मनाया जाता है जबकि पांचवे दिन संक्रांत यानी हाकु काटकोम उत्सव मनाया जाता है।इस दिन खाना खाने के बाद इस अवसर पर गांव के लोग शिकार पर निकलते है।इस प्रकार परंपरा के अनुसार सोहराय का समापन हो जाता है।
सुगनी बाद के ग्राम प्रधान मैनेजर हांसदा का कहना माने तो सोहराय हर साल फसल पकने के बाद धन-धान की कामना ओर भाई बहन के सम्मान के लिए विधि विधान से पारंपरिक रूप से मनाया जाता है।
बेलकुपी के ग्राम प्रधान बाबुलाल हांसदा ने कहा कि आदिवासी संस्कृति की धरोहर के रूप में सोहराय पर्व परंपरा गत रूप से मनाया जाता है जिसमें कोई भेदभाव नहीं किया जाता। सामुहिक पूजा,देवी देवताओं की पूजा पशु पक्षियों से लेकर पुर्वजों को हर साल पूजन किया जाता है।
भोडाबादर के अनिल टुडु ने कहा कि सोहराय में भाई बहन के प्रेम और सामाजिक परंपरा का मिलान किया जाता है परिवार के बिछुड़े भाई बहन अपने कुटुंब के साथ पर्व मनाने का अवसर प्रदान करते हैं।
इस दौरान सामुहिक नृत्य में भाग लेते हुए बेलकुपी गांव में परानिक गिरीश मुर्मू, नायकी बाबुशल मराण्डी, जगन हांसदा, बाबुशल हांसदा, सुशील टुडू आदि ।

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