रिपोर्ट- अमित कुमार!
पद्म विभूषण से सम्मानित लोकगायिका स्वर्गीय शारदा सिन्हा की जयंती पर कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार और बिहार संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इससे पहले मंत्री ने वृक्षारोपण भी किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में स्वर्गीय शारदा सिन्हा की सुपुत्री वंदना सिन्हा और सुपुत्र अंशुमन सिन्हा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
वंदना सिन्हा ने कहा कि शारदा जी हमारी संस्कृति की टीका हैं, उन्हें हमेशा दिल में बसाए रखें। उन्होंने अपनी मां को याद करते हुए छठ गीत की चार पंक्तियां भी सुनाईं, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे।
मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि शारदा सिन्हा की आवाज में बिहार की मिट्टी, लोक संस्कृति और परंपरा की आत्मा बसती थी। उन्होंने कहा कि जिस दौर में महिला का सार्वजनिक रूप से गायन आसान नहीं था, उस दौर में संघर्ष और समर्पण से शारदा सिन्हा ने अपनी पहचान बनाई और बिहार की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर शुरू हुआ। लोकगायिका चंदन तिवारी ने “जगदम्बा घर में दियरा जल दे” गीत से अपनी प्रस्तुति शुरू की, वहीं रिया सिंह ने भी अपनी मधुर लोक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों ने स्वर्गीय शारदा सिन्हा के लोकप्रिय गीतों और पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुति दी। यह सांस्कृतिक संध्या उनके संगीत और लोक संस्कृति के प्रति अतुलनीय योगदान को समर्पित रही।




