SIR के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।

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आरा/आशुतोष पाण्डेय

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे को लेकर
भोजपुर जिला कांग्रेस कमिटी ने रविवार को विरोध मार्च निकाला। जिलाध्यक्ष डॉ. श्रीधर तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय से जुलूस की शक्ल में आंबेडकर चौक स्थित समाहरणालय पहुंचे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुतले का दहन कर विरोध जताया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कई कार्यकर्ताओं ने बांह पर काली पट्टी बांध रखी थी।
प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष डॉ. श्रीधर तिवारी ने कहा कि कांग्रेस की मुख्य मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें अथवा उन्हें पद से हटाया जाए। उन्होंने उनके खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की भी मांग की। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों, विशेषकर SIR के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराई जानी चाहिए।
जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया में ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठा रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि SIR की प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। पार्टी ने भोजपुर में भी SIR के दौरान हटाए गए नामों की दोबारा जांच कराने और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि वोट भारतीय लोकतंत्र की नींव है और इसी के माध्यम से संविधान, कानून तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनादेश मिलता है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो।
कांग्रेस नेताओं ने हाल में सामने आई उस मीडिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, नए मतदाताओं के लिए Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटा के प्रबंधन और SIR से जुड़े कुछ मुद्दे शामिल थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के संदर्भ में कहा है कि लिखित टिप्पणियां और अलग-अलग विचार संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं तथा आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को दूर करने के लिए पारदर्शी और स्वतंत्र जांच जरूरी है। पार्टी ने जिला प्रशासन से मांग की कि भोजपुर में SIR के दौरान जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनकी पुनः जांच कराई जाए तथा पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बहाल किए जाएं।
प्रदर्शन में पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक राम, स्टेट बार काउंसिल सदस्य पन्नग कुमार त्रिपाठी, मीडिया प्रभारी वीरेंद्र मिश्रा, अशोक यादव, आशुतोष कुमार सिंह, शिवजी उपाध्याय, प्रो. अरुण कुमार सिंह, बबन पांडेय, राशिद इमाम मिंटू, मोहन दुबे, चितरंजन मुन्ना, मनोज कुमार अंजनी, युवा जिलाध्यक्ष डॉ. भानु प्रताप सिंह, अल्पसंख्यक अध्यक्ष शारिक खां, शक्ति सिंह मनन, घनश्याम उपाध्याय, नागेंद्र मिश्रा, डॉ. शशि कुमार सिंह, डॉ. मालती पांडेय, आनंद तिवारी, अमित मिश्रा, टपु तिवारी, अशोक सिंह, इमदाद अहमद, राघवेंद्र धारी सिंह, अब्दुल सलाम कुरैशी, रामबचन तिवारी, लाल मोहन शत्रुघ्न, रमेंद्र कुमार सिंह, नर्मदेश्वर ओझा, लुटावन चौरसिया, अरविंद पाठक, बिजेंद्र राय, अरविंद कुमार सिंह, रमेंद्र कुशवाहा, नंदजी राम, अंजनी पांडेय, अजय पासवान, रविंद्र उपाध्याय, मोहम्मद शाहिद, रोहित कुमार, रंजीत कुमार, प्रेम रंजन, घनश्याम चौधरी, जयशंकर, सैयद असलम, नीमत अली, विशाल कुमार राय, कन्हैया कुमार चौधरी, आलोक कुमार, अनिल कुमार यादव, सतीश कुमार, मुकेश कुमार, रिशु कुमार, मनोज कुमार, अजय सिंह, अरुण कुमार, श्रीकांत राय, अभिषेक सिन्हा, राजेश कुमार, रोहित कुमार, लाल बाबू शाह, आशुतोष सिंह, मनोरंजन सिंह, हरिकिशन तिवारी, अमीर हमजा खान, संजय यादव, मनीष यादव और रामविलास पांडेय समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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