सिवान – स्कुल में फर्नीचर जलाकर पकाया जा रहा मिड डे मील, व्यवस्था पर गंभीर सवाल!

SHARE:

रिपोर्ट – प्रमोद!

बच्चों के बैठने की बेंच बनी चूल्हे की लकड़ी! स्कूल में फर्नीचर जलाकर पकाया जा रहा मिड-डे मील, व्यवस्था पर गंभीर सवाल

सीवान के दरौंदा प्रखंड के बैदापुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय से सामने आए एक वीडियो ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में बच्चों के बैठने के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की बेंच जैसी सामग्री को तोड़कर चूल्हे में जलाते हुए मध्याह्न भोजन पकाया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों के बीच नाराजगी है।

वीडियो में एक महिला रसोइया चूल्हे में लकड़ी डालकर भोजन पकाती दिखाई दे रही है। चूल्हे में जल रही लकड़ी को देखने पर वह बेंच का हिस्सा प्रतीत होती है। रसोइया वीडियो में लकड़ी उपलब्ध नहीं होने की बात भी कहती नजर आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों के बैठने के लिए विद्यालय को उपलब्ध कराई गई बेंच आखिर चूल्हे तक कैसे पहुंच गई।

विद्यालय में बच्चों के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराना उनकी बुनियादी शैक्षणिक जरूरतों का हिस्सा है। लेकिन यदि वास्तव में बैठने वाली बेंच को तोड़कर मध्याह्न भोजन पकाने में इस्तेमाल किया गया है, तो यह केवल एक बेंच के जलने का मामला नहीं, बल्कि विद्यालय में मूलभूत संसाधनों और मध्याह्न भोजन व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल है। बच्चों के लिए उपलब्ध कराई गई सामग्री को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करना किसी भी स्थिति में सामान्य व्यवस्था नहीं मानी जा सकती।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने के लिए सरकार की ओर से फर्नीचर समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि भोजन पकाने के लिए ईंधन की व्यवस्था नहीं थी तो इसकी जानकारी विद्यालय स्तर से संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए थी। इसके बावजूद बेंच जलाकर खाना पकाने की स्थिति क्यों बनी, इसकी जांच जरूरी है।

मामले में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन के लिए ईंधन की निर्धारित व्यवस्था क्या थी, उसे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी थी और स्कूल में मौजूद फर्नीचर को जलाने की अनुमति किस स्तर से मिली। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस संबंध में दरौंदा के प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सौरभ सुमन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विद्यालय में बच्चों के बैठने वाली बेंच को चूल्हे में जलाने की नौबत क्यों आई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

Join us on: