रिपोर्ट – संतोष चौहान!
सुपौल। कोसी नदी के जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण कोसी के अंदर बसे लोगों की परेशानियां एक बार फिर बढ़ने लगी हैं। नदी के बढ़ते कटाव और बदलते जलस्तर के बीच किशनपुर प्रखंड क्षेत्र में लोगों के सामने अपने घर, जमीन और धार्मिक स्थलों को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। ताजा मामला मौजहा पंचायत के वार्ड नंबर-3 स्थित बेला गांव का है, जहां कटाव की चपेट में आने से एक मंदिर देखते ही देखते कोसी नदी में समा गया।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से कोसी नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसके साथ ही नदी की धारा में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। कई स्थानों पर नदी किनारे कटाव तेज हो गया है। बेला गांव में भी नदी की धारा लगातार जमीन को काट रही थी। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर के आसपास की जमीन धीरे-धीरे नदी में कटती चली गई। देखते ही देखते मंदिर का अस्तित्व भी समाप्त हो गया और वह कोसी की तेज धारा में समा गया।
मंदिर के नदी में समा जाने की घटना से ग्रामीणों में मायूसी के साथ-साथ भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि कोसी नदी का कटाव इस इलाके के लिए कोई नई समस्या नहीं है। हर साल बाढ़ और कटाव के दौरान लोगों को अपनी जमीन और घर बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कई परिवार पहले ही नदी की कटाव की वजह से विस्थापन का दंश झेल चुके हैं। अब धार्मिक स्थल भी कटाव की भेंट चढ़ने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण नदी की धारा कभी शांत तो कभी अचानक तेज हो जाती है। इससे नदी किनारे की जमीन तेजी से कटती है। कई जगहों पर खेतों के साथ-साथ गांव की ओर भी कटाव बढ़ने का खतरा बना हुआ है। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते कटावरोधी कार्य नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में और अधिक जमीन नदी में समा सकती है।
कोसी के अंदर बसे लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने आशियाने और रोजी-रोटी को बचाने की है। ग्रामीणों के खेत नदी की कटाव की चपेट में आने से खेती का रकबा लगातार कम हो रहा है। वहीं, नदी के किनारे रहने वाले परिवार हर समय इस आशंका में रहते हैं कि कहीं रातों-रात उनकी जमीन या घर कटाव की भेंट न चढ़ जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग से कटाव प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ बाढ़ के समय राहत और बचाव कार्य करने के बजाय स्थायी रूप से कटाव रोकने की व्यवस्था की जानी चाहिए। संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर वहां समय रहते कटावरोधी कार्य कराया जाए, ताकि लोगों की जमीन और बस्तियों को सुरक्षित रखा जा सके।
बेला गांव में मंदिर के कोसी में विलीन होने की घटना ने एक बार फिर इलाके में कटाव की गंभीरता को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों को अब डर सता रहा है कि अगर नदी की धारा इसी तरह जमीन काटती रही तो आने वाले दिनों में कई और परिवार इसकी चपेट में आ सकते हैं। लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर कटाव की स्थिति का जायजा लेने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।




