रिपोर्ट – अमित कुमार!
पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर आज हजारों लोगों की भीड़ देखने को मिली। दावा था कि बिहार सरकार भूमिहीन लोगों को तीन डिसमिल जमीन देने जा रही है। इसी बात को सच मानकर बिहार के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में लोग, खासकर महिलाएं, आवेदन लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंच गईं।
महिलाओं की लंबी कतार देखकर हर किसी के मन में सवाल था कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोग यहां क्यों पहुंचे हैं? क्या वाकई बिहार सरकार भूमिहीन लोगों को जमीन देने जा रही है?
इसकी हकीकत जानने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचे और आवेदन लेकर पहुंची महिलाओं से बातचीत की।
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मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर महिलाओं की लंबी कतार… किसी के हाथ में आवेदन तो कोई अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पहुंची थी। जहानाबाद, गया, दरभंगा, मधुबनी, जमुई समेत बिहार के अलग-अलग जिलों से लोग यहां पहुंचे थे।
जब इन महिलाओं से पूछा गया कि उन्हें किसने बताया कि सरकार तीन डिसमिल जमीन देने जा रही है, तो ज्यादातर का जवाब था—हमने एक-दूसरे से सुना है।
कई महिलाओं ने बताया कि वे भूमिहीन हैं और सड़क किनारे या अस्थायी ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं। उनका कहना था कि कई बार सड़क किनारे बने उनके आशियाने को प्रशासन के बुलडोजर से हटा दिया जाता है। ऐसे में वे मुख्यमंत्री से अपने लिए जमीन और घर की मांग करने पहुंची हैं।
वहीं कुछ ऐसी महिलाएं भी मिलीं, जिन्होंने बताया कि उनके माता-पिता तक नहीं हैं और इसी उम्मीद में वे छोटे-छोटे बच्चों को लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंची हैं।
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लेकिन जब ने इस पूरे मामले की पड़ताल की तो कहानी कुछ और ही निकली।
मुख्यमंत्री सचिवालय में जहां लोगों से आवेदन लिए जा रहे थे, वहां मौजूद आवेदन पत्र को जब देखा गया तो उसमें कहीं भी यह जिक्र नहीं था कि सरकार भूमिहीन लोगों को तीन डिसमिल जमीन देने जा रही है।
इसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय में आवेदन लेने वाले अधिकारियों से भी बातचीत की गई। अधिकारियों ने साफ तौर पर इस बात से इनकार किया कि इस आवेदन के जरिए तीन डिसमिल जमीन देने की कोई योजना है।
अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री के सहयोग कार्यक्रम में लोग अपनी अलग-अलग समस्याओं को लेकर आवेदन देते हैं। मामला जमीन से जुड़ा हो, मारपीट का हो या किसी अन्य समस्या से संबंधित हो—लोग अपनी शिकायत लेकर यहां पहुंच सकते हैं और उनकी समस्या सुनी जाती है।
एंकर क्लोज
यानी मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर हजारों लोगों की भीड़ जरूर पहुंची, लेकिन तीन डिसमिल जमीन देने की बात की पुष्टि न तो आवेदन में हुई और न ही मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की।
के रियलिटी चेक में जमीन देने की यह खबर अफवाह निकली। लोगों तक यह बात सुन-सुनकर पहुंची और इसी उम्मीद में बड़ी संख्या में भूमिहीन लोग मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंच गए।
हालांकि, भूमिहीन लोगों की अपनी समस्याएं जरूर हैं और उनका समाधान अब भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।




