रिपोर्टर– राजीव कुमार झा!
मधुबनी जिले के मधेपुर प्रखंड स्थित सरकारी अस्पताल का हमारे रिपोर्टर द्वारा रात के 12:30 बजे निरीक्षण किया गया तो वहां का हालात बद से बदत्तर पाया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) मधेपुर का आकस्मिक निरीक्षण के दौरान वहां की दयनीय स्थिति को देख कर अचंभित होना लाजमी है। वहां पहूच ने पर पाया गया कि मरीज वार्ड कचरे से भरा हुआ है। अस्पताल मे पहूंचते ही वहा उठ रहे दूरगंध को बरदास्त करना किसी के लिए भी कठिन था, तो इस स्थित मे अस्पताल मे भर्ती मरिज बदबू के कारण न तो आराम से बैठ पा रहे थे, नाही सो पा रहे थें, वही मरीज के साथ आए परिजन के बैठने तक के लिए ही कोई स्वच्छ जगह उपलब्ध था। फर्श पर कागज, भोजन के अवशेष और अन्य कूड़ा बिखरा पड़ा था, जो संक्रमण के खतरे को न्योता देते स्पष्ट दिखाई दे रहा था। इतना ही नही अस्पताल परिसर में लगे नलों से पेयजल की आपूर्ति ठप पाई गई। कई मरीज और उनके परिजन पानी के लिए इधर- उधर भटकते नजर आए। जबकि अस्पताल में बुनियादी सुबिधा को ध्यान मे रख कर पेयजल व्यवस्था का होना अनिवार्य है। खासकर इस उमस भरी गर्मी के मौसम मे तो पानी की जरूरत बढ जाती है। रात के ड्यूटी मे तैनात स्टाफ की संख्या भी बेहद कम दिखाई दी। जो व्यवस्थाओं की हालत को बयां करने के लिए काफी था। लेकिन हद तो तब हो गई जब अस्पताल मे सफाई कर्मी मौजूद था लेकिन सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त थी। वहीं एक मरीज कन्हैया लाल ने कहा, “सरकार लोगों के स्वास्थ्य पर करोड़ों खर्च करती है, लेकिन यहां न सफाई का माकूल कार्य है, ना पानी की व्यबस्था, बीमार व्यक्ति यहां आकर और बीमार हो जाएगा।” मीडिया कर्मी के सवालों पर स्थानीय लोगों ने कहा कि दिन में कुछ व्यवस्था मे अंतर रहने के बावजूद रात में हालत सबसे खराब हो जाती है। यहाँ आए गरीब, लाचार, अशिक्षित परिवारों के मरीजों को भारी तकलीफ का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों और मरीजों ने जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों से अविलंब इन सभी बातो की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और सीएचसी में साफ- सफाई व पेयजल की उपलब्धता बहाली को लेकर मांग किया है। स्थानीय जनहित की इस गंभीर शिकायत पर विभाग की प्रतिक्रिया अभी मिलनी बाकी है।




