आरा/आशुतोष पाण्डेय
आरा। बिहार के विश्वविद्यालयों में हाल में छह विषयों में हुई संविदा सहायक प्राध्यापक बहाली के आंकड़ों ने राज्य के अभ्यर्थियों के बीच नई बहस छेड़ दी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सामान्य वर्ग (UR) के कुल 680 पदों में बिहार के अभ्यर्थियों को महज 109 पद मिले, जबकि 571 पदों पर दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन हुआ। यानी करीब 83.97 फीसदी सीटें दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों के खाते में गईं, जबकि बिहार के हिस्से में केवल 16.03 फीसदी पद आए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यह आंकड़ा बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार के अवसरों और शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उनका तर्क है कि पीएचडी, नेट, जेआरएफ और शोध जैसी योग्यताएं हासिल करने के बाद भी राज्य के युवाओं को सीमित अवसर मिलना चिंता का विषय है।
API आधारित चयन व्यवस्था पर भी सवाल
अभ्यर्थियों के एक वर्ग ने API आधारित चयन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में लिखित प्रतियोगी परीक्षा को महत्वपूर्ण आधार बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि लिखित परीक्षा से सभी अभ्यर्थियों की विषयगत योग्यता का समान और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जा सकता है। इसके बाद शैक्षणिक योग्यता, शोध, अनुभव और अन्य निर्धारित मानकों को उचित वेटेज देकर अंतिम मेरिट तैयार की जा सकती है।
दूसरे राज्यों की भर्ती नीति का अध्ययन करने की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि बिहार के युवा जब दूसरे राज्यों में नौकरी के लिए जाते हैं तो उन्हें स्थानीय नियमों और अलग-अलग पात्रता मानदंडों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बिहार में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या में नियुक्ति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, उनका स्पष्ट कहना है कि यह दूसरे राज्यों के युवाओं के खिलाफ नहीं है। योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिलना चाहिए, लेकिन बिहार के युवाओं को भी देश के अन्य राज्यों में समान अवसर मिलना चाहिए।
सरकार से नियमित बहाली की मांग
युवाओं ने राज्य सरकार से विश्वविद्यालयों में रिक्त शिक्षकीय पदों की नियमित समीक्षा कर समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। साथ ही चयन प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और वस्तुनिष्ठ बनाने की अपील की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि ऑनलाइन और निगरानी योग्य परीक्षा व्यवस्था से चयन प्रक्रिया में विश्वास बढ़ाया जा सकता है।
नेताओं से मुद्दा उठाने की अपील
बिहार के युवाओं ने सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे को विधानसभा और संसद में उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि रोजगार का सवाल किसी एक दल का नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के भविष्य से जुड़ा विषय है।
अभ्यर्थियों की मांग है कि “नौकरी में समान अवसर, पारदर्शी चयन और योग्यता का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन” सुनिश्चित किया जाए, ताकि बिहार के युवाओं को अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर अपने ही राज्य में सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिल सकें।



