मानव तस्करी पर जीरो टॉलरेंस, लापता लोगों की त्वरित बरामदगी के साथ पुनर्वास को प्राथमिकता- मुख्यमंत्री!

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:- रवि शंकर अमित!

मुख्य बिंदु :-

मानव तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, मानव तस्करी की रोकथाम तथा तस्करों के विरुद्ध कठोर एवं त्वरित कार्रवाई सरकार की प्राथमिकता है।

मानव तस्करी के जोखिम को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।

मानव तस्करी से मुक्त कराए गए लोगों की केवल बरामदगी नहीं, बल्कि पुनर्वास, स्किलिंग, रोजगार और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना सरकार का लक्ष्य है।

‘नया सवेरा’ 1.0 और नया सवेरा 2.0 के बाद अब नया सवेरा 3.0 अभियान के माध्यम से मानव तस्करी की रोकथाम और पीड़ितों के पुनर्वास के प्रयासों को और व्यापक बनाया जा रहा है।

पटना 08 अगस्त 2026 :- मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज पटना के ज्ञान भवन में गृह विभाग, बिहार द्वारा आयोजित ‘गुमशुदा बच्चों और मानव तस्करी पर पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन’ (Eastern Zonal Conference-cum-Consultation on Missing Children and Human Trafficking’) का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। सम्मेलन में लापता बच्चों की बरामदगी, मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के पुनर्वास तथा राज्यों के बीच समन्वय को और मजबूत करने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बच्चों का लापता होना और मानव तस्करी सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है। बिहार सरकार मानव तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। तस्करी की रोकथाम के साथ पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी की रोकथाम के लिए रोजगार और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। लोगों को रोजगार के सुरक्षित और वैध अवसर उपलब्ध कराने से तस्करी के जोखिम को कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘नया सवेरा 3.0’ अभियान के माध्यम से मानव तस्करी के विरुद्ध जागरूकता, रोकथाम, बचाव और पुनर्वास की गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि तस्करी से मुक्त कराए गए प्रत्येक व्यक्ति को केवल राहत नहीं, बल्कि कौशल, रोजगार और सम्मान के साथ आत्मनिर्भर जीवन का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि इस दिशा में बिहार सरकार सभी संबंधित राज्यों, पुलिस, प्रशासन, न्यायपालिका एवं सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर समन्वित प्रयास करेगी, ताकि मानव तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और बच्चों एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। बिहार में महिलाओं की बड़ी संख्या में पुलिस बल में भागीदारी है। राज्य में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट का गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लापता बच्चों और व्यक्तियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई को समयबद्ध बनाने के लिए बिहार में रियल टाइम मॉनीटरिंग की व्यवस्था की गई है। इसके तहत राज्य में लगभग 1,200 से अधिक लापता बच्चों की रिकवरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि लोगों की शिकायतों के 30 दिनों के भीतर निष्पादन हेतु ‘सहयोग शिविर’ का आयोजन किया जा रहा है। इसके माध्यम से अब तक छह लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 5.50 लाख से अधिक मामलों का निष्पादन कराया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मामलों के निष्पादन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। यदि किसी पीडित को अधिकारी स्तर पर न्याय नहीं मिलता है या लोग इससे संतुष्ट नहीं हैं तो हम प्रत्येक माह के दूसरे मंगलवार को स्वयं ऐसे मामलों की सुनवाई करते हैं। पिछली बार ‘राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ में ऐसे 129 आवेदन मेरे समक्ष आए थे जिसमें से 100 आवेदकों से संबंधित मामलों का समाधान किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायत का निष्पादन करना नहीं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति को वास्तविक न्याय दिलाना है।

मुख्यमंत्री ने मानव तस्करी की रोकथाम के लिए पलायन को भी एक महत्वपूर्ण पहलू बताया। बिहार में उद्योगों के आने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों का आर्थिक सशक्तीकरण के साथ-साथ पलायन भी कम होगा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश की संभावना है। हाल में औद्योगिक निवेश हेतु विभिन्न स्टील उद्योग समूहों के साथ लगभग 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि बिहार में ही रोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि ‘कर्मभूमि से जन्मभूमि’ की ओर लौटने का वातावरण बिहार में तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में बिहार के लोग अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि राज्य में उपलब्ध प्रतिभा को बेहतर शिक्षा, कौशल, रोजगार और अवसरों से जोड़ा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विकास को और आगे बढ़ाने के लिए सरकार बाढ़ जैसी चुनौतियों का भी स्थायी समाधान तलाश रही है। उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या को कम करने के लिए जल प्रबंधन और सिंचाई की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। राज्य में सिंचाई की सुविधाओं का विस्तार किया गया है तथा बड़ी नदियों गंगा, गंडक (नारायणी) और कोसी को जोड़ने और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के सपने को साकार करने की दिशा में बिहार सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों, अधिकारियों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि मिसिंग चिल्ड्रेन और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की रोकथाम, लापता लोगों की बरामदगी तथा उनके पुनर्वास के लिए बिहार सरकार हरसंभव सहयोग करेगी।

कार्यक्रम में मानव तस्करी पर आधारित वीडियो फिल्म भी दिखाई गई जिसमें विस्तार से इसके दुष्प्रभावों, बचाव और कार्रवाई को लेकर बताया गया।

बिहार के महाधिवक्ता ने अंगस्वस्त्र, हरित गुच्छ और स्मृति चिह्न भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए० अमानुल्लाह, पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद, महाधिवक्ता, बिहार श्री एस०डी० संजय, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मानक कार्य प्रणाली निर्माण समिति की अध्यक्षा, भारत सरकार की एडिशनल सॉलिसटर जनरल श्रीमती अर्चना पाठक दवे और दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश श्रीमती मुक्ता गुप्ता सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहित जे० शाह सहित अन्य न्यायाधीशगण, मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक श्री विनय कुमार, भूतपूर्व पुलिस महानिदेशक श्री श्री पी०एम० नायर, मानक कार्य प्रणाली निर्माण समिति के सदस्य, वरिष्ठ अधिवक्तागण उपस्थित थे।

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